युवा नेता का दर्द भरा सफर, तमाम मुश्किलों के बाद जगनमोहन रेड्डी बनेगें सीएम

जगनमोहन रेड्डी नाम तो सुना होगा, जी हां हम बात कर रहे हैं आन्ध्र प्रदेश के युवा नेता YS Jagan Mohan Reddy की जो अब से सीएम होगें. अपने जुझारू व्यक्तित्व के लिए मशहूर जगनमोहन रेड्डी के जीवन का सफर बहुत ही मुश्किल रहा. इस नौजवान ने अपनी इच्छा शक्ति और कुशल नेतृत्व की बदौलत आंध्र के विधानसभा और लोकसभा चुनाव में YSRC को प्रचंड बहुमत दिलाया. और चंद्रबाबू नायडू की कुर्सी को हिला कर रख दिया.

कैसे शुरू हुआ जगनमोहन रेड्डी का सफर-


YS Jagan Mohan Reddy का जन्म 21 दिसंबर 1972 को कडप्पा जिले में हुआ था. हैदराबाद पब्लिक स्कूल और निजाम कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद 1996 में उनकी शादी कर दी जाती है.

अब कहानी शुरू होती है साल 2009 से-

आंध्र प्रदेश के सीएम Y.S. RAJSHEKHAR Reddy का हेलीकॉप्टर दुर्घटना में निधन हो जाता है. और प्रदेश को संभालने के लिए नए चेहरे की तलाश होने लगती है. यहीं से प्रदेश में उदय होता है एक नया चेहरा YSR का बेटा YS Jagan Mohan Reddy . दरअसल कांग्रेस के विधायक जगनमोहन को आंध्र का सीएम बनाने की मांग करने लगते हैं. पर कांग्रेस ने इस बात को नजरदांज करते हुए के रौसेय्या को सीएम बना दिया.

वाईएसआर की लोकप्रियता-


वाईएसआर की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि YSR की मौत की खबर सुनते ही कई लोगों ने आत्महत्या तक कर ली थी. जगनमोहन ने पूरे प्रदेश को सांत्वना देने के लिए यात्रा निकाली और लोगों के घर-घर जाकर उन्हे समझाने के लिए निकले पर प्रदेश की कांग्रेस सरकार उनकी यात्रा को अनुमति नही देती है.

उसके बाद YS Jagan Mohan Reddy अपनी मां के साथ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने पहुंचते हैं. यूपीए अध्यक्ष से मिलने के लिए उनको लंबा इंतजार करना पड़ता है. जब सोनिया उनसे मिलती हैं तो वह जगनमोहन को यात्रा बन्द करने के लिए कहती हैं. कांग्रेस आलाकमान की इस बात से नाराज होकर जगनमोहन ने नई पार्टी बनाई जिसका नाम रखा YSRC.

16 महीने की जेल-

फिर जगनमोहन पर आय से अधिक सम्पत्ति रखने के मामले में जांच बैठती है और दावा किया जाता है कि सन् 2003 में जगनमोहन की सम्पत्ति 10 लाख थी जो 2011 में बढ़कर 300 करोड़ हो गई. इसके बाद जगनमोहन रेड्डी को 16 महीने जेल में रहना पड़ता है.

लंबे संघर्ष के बाद साल 2019 में 46 साल के जगनमोहन रेड्डी की YSRC पार्टी ने आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनावों में 175 में से 151 सीटें हासिल की हैं. वहीं लोकसभा चुनाव में भी 25 में से 22 सीटें जीतीं. जगनमोहन ने आंध्र से नायडू सरकार को उखाड़ कर फेंक दिया है. यह कोई करिश्मा नही कई सालों की मेहनत का नतीजा है.

राजनीतिक दबदबा-

वाईएसआरसी गठन के बाद 18 कांग्रेस विधायक जगनमोहन के साथ आ गए थे. जिसके बाद उपचुनाव हुए जगनमोहन रेड्डी ने 18 में से 15 सीटें जीतीं. जिसके बाद जगनमोहन ने पीछे मुड़कर नही देखा और राजनीति में दबदबा बनाने के लिए जगनमोहन ने लगातार संघर्ष जारी रखा. जेल से निकलने के बाद चंद्रबाबू सरकार के खिलाफ पदयात्रा शुरू करने वाले जगनमोहन ने जनता की समस्याओं को समझा. इस पदयात्रा की बदौलत जगनमोहन आज सत्ता के शिखर पर हैं.


मधुकर बाजपेयी / Madhukar Vajpayee

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