योग का साथ हो तो सब मुमकिन है
  • योग स्वयं में एक परिपूर्ण शिक्षा है, जिसे सभी बच्चों को सामान रूप से प्रदान किया जा सकता है
  • सच्चा ज्ञान अपने अंदर से ही शुरू हो सकता है और अपने अंदर के ज्ञान की परतों को खोलने के लिए योग ही माध्यम है

मिलन सिन्हा

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 21 जून को देश के हर हिस्से में स्कूल-कॉलेज-यूनिवर्सिटी के करोड़ों विद्यार्थी भी योग पर्व में भाग लेंगे. विश्व विख्यात योग गुरु स्वामी सत्यानन्द सरस्वती लिखते हैं, “शिक्षा का तात्पर्य है मनुष्य का सर्वंगीण विकास.

ऐसा नहीं होना चाहिए कि विद्यार्थी में केवल किताबी ज्ञान भर दिया जाए, जो उसकी बुद्धि के ऊपर तैरता रहे -जैसे तेल पानी के ऊपर तैरता है. लोगों को अपने अंदर के विचारों, मान्यताओं और भावनाओं के प्रति जागरूक रहना चाहिए.

इस प्रकार की शिक्षा किसी तरह के दबाव में प्राप्त नहीं हो सकती. यदि ऐसा होता है तो वह उधार ली हुई शिक्षा होगी, न कि अनुभव द्वारा प्राप्त. सच्चा ज्ञान अपने अंदर से ही शुरू हो सकता है और अपने अंदर के ज्ञान की परतों को खोलने के लिए योग ही माध्यम है.

योग स्वयं में एक परिपूर्ण शिक्षा है, जिसे सभी बच्चों को सामान रूप से प्रदान किया जा सकता है. क्योंकि नियमित योगाभ्यास से बच्चों में शारीरिक क्षमता का विकास होता है, भावनात्मक स्थिरता आने के साथ ही बौद्धिक और रचनात्मक प्रतिभा विकसित होती है.

योग एक ऐसा एकीकृत कार्यक्रम है, जो बच्चों के समग्र व्यक्तित्व का संतुलित और बहुमुखी विकास करता है. दरअसल, योग की महिमा का जितना बखान करें, उतना कम है.

योग हमें अधूरेपन से पूर्णता की ओर और अन्धकार से प्रकाश की ओर सतत ले जानेवाली क्रिया है. योग आज के विद्यार्थियों के लिए जीवन को समग्रता में जीने का रोडमैप देता है.

जिससे वे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से एक सार्थक जीवन जी सकें. शिक्षा व संचार क्रांति के इस युग में अब भी योग को लेकर कहीं न कहीं यह भ्रान्ति है कि इसके अभ्यासी को संत या संन्यासी जीवन व्यतीत करना पड़ेगा.

वह एक पारिवारिक व्यक्ति का सामान्य जीवन नहीं जी पायेगा, जबकि सच्चाई इसके उलट है. योग से हम अपने अलावा दूसरों की समस्याओं को अधिक आसानी से समझने और उसका समाधान ढूंढने लायक बन पाते हैं.

ऐसा करके हम अपने परिवार और समाज के लिए भी एक बेहतर इंसान साबित होते हैं. यही कारण है कि बड़े से बड़े नेता, अभिनेता, वैज्ञानिक, डॉक्टर आदि सभी ने योग के महत्व को स्वीकारते हुए अपने रूटीन में योगाभ्यास-आसान, प्राणायाम और ध्यान को निष्ठापूर्वक शामिल किया है.

पूरा लेख पढ़ें युगवार्ता के 23 जून के अंक में…

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