किस तरह स्टैच्यू ऑफ यूनिटी ने पीछे छोड़ा इन मूर्तियों को

आज प्रधानमंत्री मोदी ने दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का उद्घाटन किया. सरदार पटेल की इस प्रतिमा ने दुनिया की अब तक की सबसे बड़ी और प्रसिद्ध स्प्रिंग टेंपल बुद्धा को पीछे छोड़कर यह खिताब हासिल किया है. लेकिन क्या आप जानते है इसे पहले दुनिया की कौन-कौन सी प्रतिमाएं इस रेस में नंबर वन पर थी. जो अब पीछे हो गई है.
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के आगे किन स्टैच्यूज की ऊंचाई हुई छोटी –

स्प्रिंग टेंपल बुद्धा, चीन
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से पहले चीन के हेनान शहर की स्प्रिंग टेंपल बुद्धा को दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा कहा जाता था. चीन में भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्प्रिंग टेंपल बुद्धा की ऊंचाई 153 मीटर है. जबकि सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा की ऊंचाई 182 मीटर है. स्प्रिंग टेंपल बुद्धा चीन घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है.

लेक्यून सेटक्यार, म्यांमार
लेक्यून सेटक्यार म्यांमार में साल 2008 में बनाई गई भगवान बुद्धा की प्रतिमा है. यह प्रतिमा दुनिया की सबसे बड़ी तीन प्रतिमाओं में से एक है. जिसकी ऊंचाई 116 मीटर है.

उशिकु दायबुत्सु, जापान
उशिकु दायबुत्सु जापान के शहर उशिकू में बनी एक बहुत खबूसूरत और आकर्षक प्रतिमा है. जिसकी ऊंचाई 120 मीटर है. यह प्रतिमा साल 1993 में बनकर पूरी हुई थी. बुद्धा की यह प्रतिमा ब्रांज मेटल से बनाई गई है.

स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी
अमेरिकी के न्यूयॉर्क शहर जाने वाले हर टूरिस्ट की नजर अगर सबसे पहले किसी पर पड़ती है तो वो है स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी. जो अमेरिकी की पहचान बन चुकी है. स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी को फ्रांसीसी कारीगरों ने अमेरिका को गिफ्ट में दिया था. रोमन लिबर्टी गॉडेस लिबर्टास के इस स्टैच्यू की ऊंचाई 93 मीटर है. जो साल 1986 में बनकर पूरी हुई थी.

द मदरलैंड कॉल्स, रुस
रुस अपने हिस्टोरिकल ब्यूटी के लिए दुनियाभर में मशहूर है. और रुस के वोल्गोग्राड शहर की द मदरलैंड कॉल्स का स्टैच्यू भी यहां आने वाले टूरिस्ट को उसी इतिहास की झलक दिखाता है. इस स्टैच्यू को स्टालिन के साथ हुई लड़ाई के हीरोज की याद में बनाया गया था. इसकी ऊंचाई 85 मीटर है.
सरदार पटेल की याद में बनी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा तो है ही, साथ ही यह प्रतिमा दुनिया भर के लोगों को यूनिटी का एक अहम संदेश भी देगी.