WORLD CANCER DAY आज.. जानें CANCER से जुड़ी ये बातें

दुनिया भर में 04 फरवरी को यानी आज World Cancer Day मनाया जा रहा है. इस बार
Cancer Day की थीम ‘आई एम एंड आई विल’ रखी गई है.

यह थीम मन के हारे हार है, मन के जीते जीत को सच साबित करती दिख रही है. एक अनुमान के अनुसार 2025 तक इस बीमारी से मरने वालों की संख्या 60 लाख तक होने की आशंका है.

World Cancer Day दुनिया भर में इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इस घातक बीमारी से लोगों को अवेयर किया जा सके. बीमारी से पीड़ित लोगों को इससे लड़ने की हिम्मत दी जा सके.


ये हैं कैंसर के लक्षण-
– घाव का जल्दी न भरना
– शरीर के किसी भी हिस्से से ब्लिडिंग होना 
– वजन का अचानक घटना या भूख न लगना
– खाना निगलने में परेशानी होना
– स्कीन पर तिल या मस्से में चेंज आना 
– लगातार खांसी या आवाज में कोई बदलाव 
– शरीर के किसी भी हिस्से में गांठ होना

क्या करें – 
– हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाएं
– अपने वेट पर कंट्रोल रखें
– रेगुलर हेल्थ चैकअप कराएं
– भरपूर मात्रा में फलों एवं सब्जियों का सेवन करें

क्या न करें – 
– स्मोकिंग और ड्रिंकिंग न करें
– मसालेदार, तली हुई, जंक फूड और प्रिजर्वड फूड अवोइड करें
– नमक और चीनी का सेवन बैलेंस बनाकर करें
– महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल लंबे समय तक न करें. लंबे समय तक गोलियों का सेवन करने से स्तन कैंसर या लीवर कैंसर और हृदयघात का खतरा बढ़ जाता है. 

ये है हेल्थ एक्सपर्ट्स की राय

हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि कैंसर के 90 परसेंट मामले मुंह और फेफड़े से संबंधित पाए जा रहे हैं. पेशेंट्स में कुछ दूसरे तरह के कैंसर भी देखे जा रहे हैं.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अलर्ट रहकर कैंसर को पनपने से रोका जा सकता है. World Cancer Day पर एक्सपर्ट्स ने लोगों से तंबाकू की लत छोड़ने की अपील की है.

टाटा मेमोरियल सेंटर के हेड-नेक कैंसर सर्जन प्रोफेसर डॉ. पंकज चतुर्वेदी ने मीडिया को बताया कि लगभग नब्बे फीसदी मरीज तंबाकू का सेवन करते हैं. यह भी देखने में आया है कि धुआं रहित तंबाकू सेवन करने वालों को कम उम्र में ही कैंसर हो जाता है.

ऐसे लोगों की मृत्यु दर भी अधिक है. अधिकतर मामलों में तंबाकु और स्मोकिंग की शुरूआत युवावस्था में होती है. इसका प्रमुख कारण दूसरे की देखा-देखी और विज्ञापनों के प्रति आकर्षित होना सामने आया है.

उन्होंने बताया कि यह बहुत ही दुख की बात है कि ऐसे युवाओं की मौत बहुत कम उम्र में हो जाती है. हमें अपने युवाओं को बचाने के लिए गुटखा, खैनी, पान मसाला आदि के खिलाफ आंदोलन चलाने की जरूरत है.

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