Night-shift working women
Night-shift working women

दोहरी जिम्मेदारियां निभाने वाली महिलाएं आज हर क्षेत्र में महारथ हासिल कर रही हैं. हालांकि लगातार बदलती और भागदौड़ भरी जीवनशैली के चलते महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

प्रेग्नेंसी के दौरान एक्ट‍िव बने रहना मां और बच्चे दोनों के लिए ही अच्छा है लेकिन इस दौरान मां के नाइट शिफ्ट करने का बुरा असर बच्चे पर भी पड़ सकता है.

इसके आलावा रात की शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं को ऑस्टियोपोरोसिस, हृदय रोग, मेनोपॉज और याददाश्त जैसी कई समस्याएं हो जाती हैं. बॉडी क्लॉक डिस्टर्ब हो जाने से उन्हें दिनभर सुस्ती लगती रहती है और शरीर की कैलोरी बर्न नहीं होती जिसकी वजह से वजन बढ़ने लगता है. प्रेग्नेंसी में मोटापा काफी खतरनाक हो सकता है.

हाल ही में हुए एक सर्वे में महिलाओं की रात की शिफ्ट में काम करने से जुड़ी एक बड़ी बात सामने आई है. इस शोध में ये पाया गया है कि रात की शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं में गर्भवती की संभावना ज्यादा होती है.

शोधकर्ताओं ने अपने शोध में माना है कि रात की शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं को फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं, जैसे अनियमित पीरियड्स, गर्भपात आदि समस्याएं अधिक होती हैं जिससे उनके गर्भवती होने की संभावना कम हो जाती है. महिलाओं में अनियमित पीरियड्स की आशंका 33 प्रतिशत अधिक होती है जबकि गर्भपात का खतरा 29 प्रतिशत बढ़ जाता है.

दरअसल खाने और सोने के समय में बदलाव के कारण शरीर में हार्मोन के निर्माण और ब्लड प्रेशर आदि प्रभावित हो जाते हैं.

कैसे पाएं निजात

रात की शिप्ट में नौकरी के दौरान अगर खानपान और व्यायाम पर ध्यान दिया जाए तो इस रिस्क को कुछ हद तक कम भी किया जा सकता है पर नौकरी छोड़ देने इस समस्या का हल नहीं है.

इतना ही नहीं बच्‍चे के लिए योजना बना रहीं महिलाओं को स्‍त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह ले लेनी चाहिए.