28 साल बाद अपने हक के लिए सड़कों पर उतरीं इस देश की महिलाएं

स्विट्जरलैंड में महिलाएं अपने ऊपर हो रहे अत्याचार और भेदभाव को लेकर अपनी-अपनी नौकरियां छोड़कर सड़कों पर उतर आई हैं. यहां महिलाओं ने उचित वेतन, समानता, यौन उत्पीड़न एवं हिंसा के रोकथाम की मांग को लेकर अंत:वस्त्रों को जलाकर विरोध दर्ज कराया.

दरअसल लैंगिकता को लेकर नाराजगी और कार्यस्थल पर हो रही असामनता को लेकर बढ़ते आक्रोश ने स्विट्जरलैंड में इस महिला आंदोलन को जन्म दिया है. देश में 28 साल में इस तरह का महिलाओं का ये पहला प्रदर्शन है. इससे पहले 14 जून 1991 में असमानता झेल रहीं 5 लाख महिलाएं कार्यस्थल और घरों से विरोध जताने सड़कों पर निकली थीं.

सैकड़ों की तादाद में महिलाओं ने शहर के कैथेड्रल में रैली निकालते हुए शहर के केंद्र की ओर मार्च निकाला, जहां उन्होंने लकड़ियों में आग लगाई और फिर उस आग में अपनी टाई, अंत:वस्त्रों को फेंक दिया. महिलाओं के इस प्रदर्शन को ‘‘पर्पल वेव” कहा गया क्योंकि इस प्रदर्शन के लिए महिलाओं ने पर्पल रंग को चुना था.

स्विट्जरलैंड में महिलाएं को अभी भी पुरुषों की तुलना में 20 फीसद कम वेतन मिलता है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार, समान योग्यता वाले पुरुषों और महिलाओं की मजदूरी का अंतर लगभग आठ प्रतिशत है.

बता दें कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की 2018 जेंडर गैप रिपोर्ट ने स्विट्जरलैंड को 149 देशों में 20 वें स्थान पर रखा था.

Leave a Comment

%d bloggers like this: