धारा 370 ने कैसे छीन ली थी कश्मीर की बेटियों की आजादी

मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में धारा-370 को खत्म कर दिया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी के बाद ये फैसला लागू हो चुका है. इस फैसले को लेकर महिलाओं की जिंदगी पर भी बड़ा असर देखने को मिलेगा.

धारा-370 में महिलाओं के लिए क्या थे प्रावधान

धारा 370 के तहत कुछ विशेष अधिकार कश्मीर की जनता को मिले हुए थे. वहीं केवल महिलाओं की बात करें तो इसके चलते जम्मू-कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जाती थी. इसके विपरीत यदि वो पकिस्तान के किसी व्यक्ति से शादी कर ले तो उसे व्यक्ति को भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जाती थी. वहीं कश्मीर में महिलाओं पर शरियत कानून लागू है.

कितनी अजीब बात है कि जम्मू-कश्मीर में पैदा होने के बावजूद वहां की लड़कियां बाहर शादी करने के कारण अपने जन्म स्थान में संपत्ति खरीद कर मकान नहीं बनवा सकतीं जबकि वो भारत में यहां तक कि दुनिया में कहीं भी संपत्ति खरीद सकती हैं. इससे जम्मू-कश्मीर की महिलाओं से उनके अपनी पसंद की शादी करने का हक छीनता है.

कश्मीर की ये बेटी बनी थी राजस्थान की बहू

इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं सारा. जम्मू- कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की बेटी और उमर अब्दुल्ला की बहन सारा अब्दुल्लाह कांग्रेस के युवा नेता सचिन पायलट की पत्नी हैं. दोनों की मुलाकात उस समय हुई थी जब वो विदेश में पढ़ाई कर रहे थे.

हालांकि दोनों की शादी आसान नहीं रही. सचिन जहां हिंदू परिवार से आते हैं वहीं सारा मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखती हैं. इसके साथ ही दोनों राजनीतिक घरानों से आते हैं.

दोनों ने किसी की परवाह किए बिना जनवरी 2004 में शादी कर ली. खबरों की मानें तो अब्दुल्ला परिवार दोनों की शादी में शामिल नहीं हुआ और कई सालों तक सचिन को दामाद के रूप में स्वीकार नहीं किया था. कुछ समय बाद अब्दुल्लाह परिवार ने भी दोनों के रिश्ते को अपना लिया.

कश्मीर में महिलाओं की स्थिति

जम्मू-कश्मीर में बेशक एक महिला दो साल के करीब मुख्यमंत्री के पद पर रही हों पर जब महिला सशक्तिकरण की बात आती है तो जम्मू कश्मीर कई राज्यों की तुलना में पिछड़ा हुआ है. 2011 में जारी सेंसेक्स के आंकड़ों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में महिलाओं की आबादी 59 लाख है पर इनमें मात्र 14.4 प्रतिशत महिलाएं ही कामकाजी हैं. इसके साथ ही राज्य में महिला साक्षरता दर 60 प्रतिशत भी नहीं है. ऐसे में यहां पर कामकाजी महिलाओं की संख्या कम होना स्वभाविक है.

कश्मीर में होते बवाल के कारण यहां महिलाओं को कई तरह की मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता रहा है. ऐसी महिलाओं की संख्या हाल के दिनों में काफी बढ़ गई हैं.

वहीं जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक़, बीते कुछ साल में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध काफी तेजी से बढ़े हैं.

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