पाकिस्तान ने क्यों किया था कारगिल पर कब्जा, क्या थी उसकी गंदी चाल?

पाकिस्तान ने कारगिल घुसपैठ को का कोड नाम रखा था ‘ऑपरेशन बद्र’. इसके पांच मकसद थे.

पहला- सबसे पहले श्रीनगर-लेह हाईवे को रोकना और बंद करना क्योंकि इसी रास्ते से लद्दाख में सैनिकों को रसद सप्लाई होती थी.
दूसरा- सियाचीन से भारतीय सैनिकों की वापसी का दबाव ड़ालना.
तीसरा- इस घुसपैठ के जरिए अपनी ताकत को बढ़ाना ताकि भारत पर कश्मीर विवाद को सुलझाने के लिए अपनी शर्तें लगाई जा सकें.
चौथा- जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को और अधिक बढ़ाना.
पांचवा- कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचना.

लेकिन भारतीय सैनिकों की जाबांजी के चलते पाकिस्तान का एक भी मंसूबा कामयाब नहीं हो सका था. कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना और गुप्तचर एजेंसियों के बीच टकराव भी देखने को मिला. सेना का मानना था कि यदि सही सूचनाएं सही समय पर मिलती तो युद्ध की हालत नहीं पैदा होती.

सेना ने घुसपैठ में पाक सेना का हाथ होने की आशंका जताई, सेना ने कहा था कि आतकी चोटियों पर कब्जा नहीं करेंगे, ये पाक सेना का काम है. उस वक्त भी खूफिया ऐेजेंसियां इसे मानने को तैयार नहीं थीं. खूफिया ऐजेंसियों के मुताबिक आतंकियों ने चोटियों पर कब्जा किया है.

कारिगल जंग के दौरान ही 6 जून को पाकिस्तान की तरफ से बातचीत का प्रस्ताव आया. तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 7 जून को देश को संबोधित करते हुए कहा कि मैं साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि यदि घुसपैठ के माध्यम से नियंत्रण रेखा को बदलने के साथ बातचीत करने की भी चाल है तो प्रस्तावित बातचीत शुरू होने से पहले ही समाप्त हो जाएगी.

वाजपेयी ने सेना पर भरोसा जताते हुए कहा कि हमें हमारी फौज की ताकत पर भरोसा करना चाहिए. हमारी सेना इस लक्ष्य को हासिल करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में कोई इस तरह की गतिविधियों में शामिल होने का दुस्साहस भी न करें.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री सरताज अज़ीज़ चीन होते हुए 12 जून को दिल्ली पहुंचे. उन्होंने तीन सूत्री प्रस्ताव भारत के सामने रखा. पहला- युद्ध विराम, दूसरा- नियंत्रण रेखा की समीक्षा और निर्धारण के लिए एक वर्किंग ग्रुप बनाया जाए. और तीसरा- अगले सप्ताह में इसी तरह से भारतीय विदेश मंत्री भी पाकिस्तान की यात्रा करें.

नई दिल्ली ने इस प्रस्ताव को सिरे से ठुकरा दिया था. प्रधानमंत्री वाजपेयी ने एक बार फिर से सार्वजनिक बयान दिया कि भारत अंतरराष्ट्रीय सीमा या नियंत्रण रेखा का उल्लंघन नहीं करेगा.

साभार- वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी की किताब ‘हार नहीं मानूंगा’ से कुछ अंश

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