क्यों काशी में कोई कभी भूखा नही सोता, क्या है काशी का रहस्य

मां अन्नपूर्णा आदिशक्ति जगदम्बा का ही एक रूप है. सनातन धर्म में मां अन्नपूर्णा को ही समस्त संसार का भरण-पोषण करने वाली माना गया है. धन-धान्य और सुख की प्रतिमूर्ति मां अन्नपूर्णा अपने भक्तों को कभी भूखा नही रहने देती हैं और इनकी कृपा से घर में अन्न की कमी नही होती.

कहते हैं कि काशी में मृत्यु होने पर बाबा विश्वनाथ जीवों को मोक्ष प्रदान करते हैं, वहीं मां अन्नपूर्णा जीवित जनों के भोजन की व्यवस्था मां स्वयं देखती हैं इसलिए कहा जाता है कि काशी में कोई कभी भूखा नही सोता.

जब श्रीराम माता सीता को रावण के चंगुल से छुड़ाने के लिए लंका पर चढ़ाई कर रहे थे, तब वानर सेना को भूख लगने पर श्रीराम ने मां अन्नपूर्णा का आह्रवाहन किया, तब मां अन्नपूर्णा सेना की भूख मिटाई और उनको आशीर्वाद दिया.

अन्नपूर्णा का अर्थ है अन्न की अधिष्ठात्री मतलब वह देवी जिनकी आराधना करने से घर में कभी अन्न-जल की कमी नही होती. हिन्दू धर्म की एक कथा के अनुसार एक बार काशी में अन्न-जल की कमी हो गई. काशी में पड़े अकाल से तंग आकर काशी के लोग त्राहि-त्राहि करने लगे.

अपने काशी में लोगों को परेशान देखकर बाबा विश्वनाथ ने मां पार्वती से अन्नपूर्ण के रूप में प्रकट होने का आह्रवाहन किया. तब मां अन्नपूर्णा ने काशी में अवतरित होकर धान दिए, भगवान शिव ने धान को लोगों में बांट दिया. लोगों ने चावलों को लेकर मां की जय-जयकार करने लगे.

भगवान भोले ने मां को काशी में बसने के लिए कहा. उसके बाद मां अन्नपूर्णा काशी में ही बस गई. धनतेरस के दिन मां की पूजा की जाती है. और उनको अक्षत चढ़ावे के रुप में चढ़ाए जाते हैं.

मां अनाज की देवी हैं इनकी पूजा करने से घर में कभी भी कोई भूखा नही सोता. कहा जाता है कि जिस घर में अन्न का अपमान होता है, मां उस घर में कभी भी वास नही करती.

किसानों को अन्नदाता कहते हैं, इसलिए अन्नपूर्णा जयंती पर उनका पूजन करते हैं. स्कन्द पुराण में लिखा है कि मां भवानी ही अन्नपूर्णा है. मां के प्रसन्न होने पर दरिद्रता का निवारण हो जाता है. काशी में काशी विश्वनाथ मंदिर के पास ही मां अन्नपूर्णा का मंदिर स्थित हैं. यहां धनतेरस के दिन भक्तों को धान की बाली प्रसाद के रूप में दी जाती है.


मधुकर बाजपेयी / Madhukar Vajpayee

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