जानिए कब-कब सामने आए इस रहस्यमयी प्राणी 'YETI' के किस्से!

नई दिल्ली. अपने बचपन में किसी न किसी ने हिममानव की कहानी जरूर सुनी होगी. हिममानव की मौजूदगी को लेकर हमेशा से ही तरह-तरह के अनुमान लगाए जाते रहे हैं. कई ऐसे लोग हैं जो हिममानव को देखने का दावा करते हैं, हालांकि इस बारे में कोई प्रत्यक्ष प्रमाण आज तक नहीं मिल पाया है.

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प्राचीन काल से ही हिमालय में हिममानव के रहने की बात कही जाती थी. अब भारतीय सेना ने सोमवार को हिममानव की मौजूदगी के संकेत दिए हैं. भारतीय सेना ने हिममानव की मौजूदगी का दावा किया, वो भी तस्वीरों के साथ.

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सोशल मीडिया पर ‘हिम मानव के निशान’ की ये फोटोज काफी शेयर की जा रही हैं. फोटोज को ट्विटर पर सैकड़ों बार रिट्वीट किया गया है.

कैसा होता है येति?
दुनिया के सबसे रहस्यमय प्राणियों में से एक ‘येती’ की कहानी लगभग हजारों साल पुरानी है. कई बार इन्हें देखे जाने की खबरें भी आ चुकी हैं. येति के बारे में कहा जाता है कि यह विशाल वानर जैसा होता है, जिसके पूरे शरीर में बाल होते हैं और वो इंसानों की तरह चलता है. येति के बारे में प्रचलित है कि ये हिमालय की गुफाओं और कंदराओं में रहता है.

जानिए कब कब सामने आईं येती की तस्वीरें

  • -पहली बार 1951 में विशालकाय पैरों के निशान की तस्वीरें छपी थीं
  • -येती को देखने के दावे कई लोगों ने किए लेकिन उन्होंने इसका कोई सबूत नहीं दिया. पहली बार अगर किसी सबूत दिखाने का काम किया तो दुनिया के विख्यात पर्वतारोही एरिक शिप्टन ने. उन्होंने विशालकाय पैरों के निशान की कुछ तस्वीरें खींची थीं. 1951 में ये तस्वीरें प्रकाशित हुईं थी. आलोचकों का दावा था कि यह आकृति बर्फ के पिघलने से बनी है.
  • -1951 में ब्रिटिश खोजी एरिक शिप्टन माउंट एवरेस्ट पर जाने के लिए प्रचलित रास्ते से अलग एक रास्ते की तलाश कर रहे थे तो उन्हें बहुत बड़े-बड़े पैरों के निशान दिखे. उन्होंने इन निशानों की तस्वीरें ले लीं. और यहीं से शुरु हुई, आधुनिक युग में येति के रहस्य की चर्चा.
  • -एरिक ने ये तस्वीरें पश्चिमी एवरेस्ट के मेन लोंग ग्लेशियर पर खींची थीं. पैरों के ये निशान करीब 13 इंच लंबे थे और इसे अब तक हिमालय पर ली गई तस्वीरों में सबसे रोचक तस्वीरों में गिना जाता है.
  • -हालांकि अभी भारतीय सेना ने जिन पैरों के निशान देखे हैं वे इससे कहीं ज्यादा बड़े हैं.
  • -येति को देखने के कई मामले सामने आए और कई खोजियों और शेरपाओं ने पैरों के निशान देखने का दावा किया लेकिन कुछ भी पुख्ता साबित नहीं किया जा सका.
  • -एक हिमालयी खोजी ब्रायन बार्ने ने 1959 में अरुण घाटी में येति के पैरों के निशान देखे. जिसके बाद एक इटली के पर्वतारोही रैनोल्ड मेसनर ने तो यह दावा भी कर दिया कि उन्होंने येति को देखा है.
  • -येति के किस्से 326 ईसा पूर्व में भी मिल जाते हैं, जब सिकंदर भारत को जीतने आ पहुंचा था, उसने एक येति को देखने की इच्छा जाहिर की थी क्योंकि उसने येति की कहानियां सुन रखी थीं. हालांकि उसे येति देखने को नहीं मिला. इसके अलावा येति के होने का दावा तब पुख्ता होता है, जब एक ब्रिटिश फोटोग्राफर एरिक शिप्टन ने उसे देखने का वादा किया.
  • -आधुनिक समय में सबसे पहले 1921 में हिममानव को देखने का दावा किया गया था. हेनरी न्यूमैन नाम के एक पत्रकार ने ब्रिटेन के खोजकर्ताओं के एक दल का इंटरव्यू लिया था. खोजकर्ताओं ने दावा किया था कि उनको पहाड़ पर पैरों के विशालकाय निशान दिखाई पड़े थे. उनके गाइड ने बताया था कि वे निशान मेतोह-कांगमी के हैं. मेतोह का मतलब होता है आदमी जैसा दिखने वाला भालू और कांगमी का मतलब बर्फों पर पाया जाने वाला इंसान.
  • -एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1925 में एन.ए.तोम्बाजी नाम के एक फोटॉग्रफर ने येती के हुलिया के बारे में बताया था. उन्होंने बताया था, ‘उसकी आकृति बिल्कुल इंसान जैसी थी. वो सीधा खड़ा होकर चल रहा था. बर्फ के बीच उसका डार्क कलर नजर आ रहा था. जहां तक मैं देख पाया, उसने कोई कपड़ा नहीं पहन रखा था.’
  • -1986 में मशहूर पर्वतारोही रीनहोल्ड मेसनर येती से सामना होने का दावा किया था.
  • -फतह करने के दौरान सर एडमंड हिलरी और तेनजिंग नॉर्गे ने भी विशालकाय पैरों के निशान देखने का दावा किया था.
  • -2007 में अमेरिका में एक टीवी शो को होस्ट करने वाले जोश गेट्स ने भी कुछ इस तरह का दावा किया था. उन्होंने कहा था कि हिमालय में एक झरने के करीब बर्फ पर उनको पैरों के तीन रहस्यमय निशान मिले थे. हालांकि स्थानीय लोगों ने गेट्स की बात को खारिज कर दिया था.
  • -2009 में एक फिल्म निर्माता पियोत्रगोवाल्सकी ने दावा किया कि मैंने पोलैंड की पहाड़ियों पर येति को धूमते हुए देखा है. उनके मुताबिक बंदर जैसे दिखने वाले इस प्राणी के शरीर पर घने काले बाल थे. यह राक्षस की तरह दिख रहा था.
  • -2011 में एडिनबर्ग चिड़ियाघर के शोधकर्ताओं ने एक अंगुली पर शोध किया. वह अंगुली नेपाल के एक मठ में थी. उसके बारे में दावा किया जाता था कि वो येती की अंगुली है. जांच में पता चला कि वह किसी इंसान की अंगुली थी.

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