पति के कुकृत्यों पर भारतीय नारी कब उठाएंगी आवाज

अमेरिका में अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड के हत्यारे पुलिस अधिकारी डेरेक चौविन की पत्नी कैली उससे तलाक लेने जा रही है. वह नाराज और शर्मिंदा है. वह नहीं चाहती है कि उसे ऐसे धूर्त आदमी की पत्नी कहा जाये जिसने एक अश्वेत की निर्मम हत्या की हो.

जरा सोचिए कि कितना ऊँचा जमीर होगा कैली का. अब उसकी जरा तुलना करें भारत के उन एनकाउंटर पसंद पुलिस वालों, भ्रष्ट सरकारी बाबूओं, टैक्स न देने वाले कारोबारियों, देश के रक्षा सबंधी अहम दस्तावेज दुश्मनों को चंद सिक्कों के लिए थमाने वालों की पत्नियों से. क्या किसी को याद आता है कि जब देश-समाज के दुश्मन किसी इंसान की पत्नी ने भारत में उससे तलाक लेने की पहल की हो?

सबको पता है कि हमारे यहां सेना के कुछ आला अफसर देश की सुरक्षा से संबंधित जानकारी दुश्मन मुल्कों को देते रहे हैं. क्या देश भूल गया जब मेजर जनरल फ्रेंक लारकिंस, उनके भाई एयर मार्शल कैनिथ लारकिंस और लेफ्टिनेंट कर्नल जसबीर सिंह को देश के बेहद संवेदनशील रक्षा दस्तावेजों की सप्लाई करते हुए पकड़ा गया था?

उस सनसनीखेज केस को लारकिंस जासूसी कांड का नाम दिया गया था. इन तीनों पर लगे आरोप साबित भी हुए थे. क्या इन सबकी पत्नियों या परिवार के शेष संबंधियों ने इनके साथ संबंध तोड़े? नहीं. शायद इनकी आत्मा मर चुकी थी. देखा जाए तो ये भी अपने पतियों के काले कारनामों का हिस्सा थीं. क्या ये देख नहीं रही थी कि इनके घर में पैसे की इतनी रेलमपेल कैसे होने लगी है?

डेरेक चौविन की पत्नी कैली की नैतिकता को आप अमेरिकी समाज की नैतिकता मानें या ना मानें यह आपकी मर्जी है लेकिन उसकी व्यक्तिगत जमीर को मानना ही पड़ेगा. यदि हममें इंसानियत है तो कम-से-कम उस महिला को सलाम तो कर ही सकते हैं.

सेना की जासूसी करना अक्षम्य अपराध की श्रेणी में आता है. इस अपराध में लिप्त किसी भी व्यक्ति के साथ नरम व्यवहार करने की कल्पना तक नहीं की जा सकती है. उन्हें कठोरतम सजा मिलती भी है. पर इन्हें अपने घर और समाज से किसी तरह का दंड नहीं मिलता. यही समझने वाली बात है. ये अपनी पत्नी के लिए तो सदैव आदर्श ही बने रहते हैं.

अब ताजा मामला यस बैंक के पूर्व चेयरमेन का ही लें. राणा कपूर ने यस बैंक को तबीयत से नोच-नोचकर खाया. उनके “लूट सके तो लूट” मिशन का हिस्सा थीं उनकी पत्नी और बेटियां भी. क्या किसी का जमीर नहीं जागा कि वे अपने पति-पिता को समझाती कि वे रास्ते से भटकते रहे हैं. पर उन्होंने ये सब करना सही नहीं माना क्योंकि काले पैसों की आवक ने उनकी आंखों पर पट्टी बाँध दी थी.

उनकी नैतिकता और जमीर धूल में मिल गया था. राणा कपूर जैसे तत्व हमने बहुत से बैंकों में देखे हैं. कुछ समय पहले सरकारी क्षेत्र के बैंकों के हर माह दर्जनों मुलाजिमों को नौकरी से बर्खास्त किये जाने की खबर छपी थी. ये सभी भ्रष्ट आचरण के मामलों में फंसे थे.

पर क्या किसी को याद है कि किसी भ्रष्ट अफसर की श्रीमती जी ने अपने पति को इसलिए तलाक दिया हो कि वह देश या समाज के ऊपर कलंक था? आपको इस तरह का उदाहरण नहीं मिलेगा क्योंकि इतना बड़ा कदम उठाने की हिम्मत नहीं मिलती.

सबको पता कि क्रिकेट में सट्टेबाजी के आरोप बहुत से बड़े क्रिकेटरों पर लगे और सिद्ध भी हुए. पर क्या कभी किसी क्रिकेटर की पत्नी या परिवार ने उनसे संबंध तोड़े? यही रवैया हमारे समाज का भी रहा. मोहम्मद अजहरुद्दीन, अजय जडेजा, अजय शर्मा आदि उस सट्टेबाजी में फंसे थे.

अब तो उन क्रिकेटरों में से कई टीवी पर विशेषज्ञ की हैसियत से नियमित रूप से अपनी राय का इजहार कर रहे होते हैं. राजनीति में स्वच्छता और शुचिता के प्रवचन देने वाले नेता कौन से पीछे हैं. ये भी अपने बिगड़ैल बच्चों को संरक्षण देने से कभी पीछे नहीं हटते. मतलब इनके आह्वान और प्रवचन, पड़ोसियों और जनता के लिए ही होते हैं.

क्या आपको याद आ रहा है कि कभी किसी नेता ने अपने समाज विरोधी पुत्र या पुत्री पर सख्त कार्रवाई की हो? श्रीमती इंदिरा गांधी तक ने कभी संजय गांधी को नहीं रोका, ताकि वे रास्ते से पूरी तरह से भटके नहीं. ये सच है कि सुनील दत्त ने भी अपने पुत्र संजय दत्त को मुंबई दंगों में लिप्त होने के आरोपों से बचाने के लिए सब तरह के प्रयास और समझौते किए थे.

कुछ साल पहले लखनऊ में एक कंपनी के अफसर विवेक तिवारी का नृशंस कत्ल एक पागल पुलिसिए ने सड़क पर गोली मारकर कर दिया था. उसके बाद जो हुआ उसपर हम चाहें तो शर्म कर सकते हैं. तिवारी के हत्यारे के पक्ष में उनकी पत्नी और उनकी जाति के लोग डटकर खड़े हो गए. कुछ लोग विवेक तिवारी की मौत को मात्र एक ब्राह्मण की हत्या के रूप में देख रहे थे.

अब बोलिए कि हमारे समाज का जमीर कब जागेगा? देखिए कैली बनना आसान तो नहीं है, पर समाज तब ही साफ होकर निकलेगा जब हमारे यहां नैतिकता के सवाल पर लोग समझौता करना बंद कर देंगे. हम बातें तो बहुत बड़ी-बड़ी करते हैं, पर जब अपने ऊपर कोई बड़ा निर्णय लेने की चुनौती आती है, तब पीछे होने लगते हैं.

महात्मा गांधी के ज्येष्ठ पुत्र हरिलाल गांधी रास्ते से भटक गए थे. वे नशीले पदार्थों का सेवन भी करने लगे थे. तब गांधी जी ने उनसे सारे संबंध तोड़ लिए थे. हालांकि पिता-पुत्र के बीच कभी-कभार मुलाकात भर हो जाती थी. पर गांधी जैसी शख्सियतें सदियों में जन्म लेती हैं. सामान्य जनों या फिर आज के सियासत के खिलाड़ियों से उनकी तुलना बेमानी होगी.

असल में बात यह है कि हमारे समाज का कोढ़ तब साफ होगा जब हम बिल्कुल अपनों को भी गलत कृत्य के लिए दंडित करेंगे. कैली ने यही तो किया है. कैली ने एक असाधारण महिला होने का परिचय दिया है. भारतीय पत्नी की छवि देवी के रूप में पेश की जाती है. यह ठीक भी है. आखिर वह अपने पति का हर आड़े वक्त में साथ भी देती है. पर उसी पत्नी को अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड के हत्यारे डेरेक चौविन की पत्नी कैली को भी अपना आदर्श मानना होगा.

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