#YuvrajSingh : क्या हुआ था ऐसा कि, बैन कर दिए गए थे युवराज के छक्के

भारतीय क्रिकेट के धुरंधर बल्लेबाजों में शुमार युवराज सिंह ने आज क्रिकेट जगत को अलविदा कह दिया है. युवराज ने अपनी शानदार खेल के बदौलत कई मैचो को पलटा है. युवराज के 19 साल के क्रिकेट करियर में एक समय ऐसा भी आया की जब युवराज को कैंसर जैसी गंभीर बिमारी से जुझना पड़ा था जिसे युवराज मात देते हुए मैदान में वापस आ गए.

युवराज को क्रिकेट में लाने वाले उनके पिता योगराज सिंह थे, युवराज को क्रिकेट में किसी तरह की कोई भी रुचि नही थी. लेकिन योगराज के कड़ाई के चलते युवराज क्रिकेट कि ऊंचाईयों को छु सके. युवराज ने 304 वनडे इंटरनेशनल मुक़ाबलों में 111 विकेट चटकाए हैं और उनका सर्वश्रेष्ठ 31 रन देकर 5 विकेट है.

आज हम आपको उस बात के बारे में बताने जा रहे है जब युवराज सिंह को उनकी शानदार बल्लेबाजी के चलते उनके लंबे छक्कों को बैन कर दिया गया था. और कुछ नए नियमों को भी लागू किया गया था.

हिमाचल प्रदेश के चैल दुनिया का क्रिकेट ग्राउंड सबसे अधिक ऊँचाई पर स्थित है. ये समुद्र तल से 2,444 मीटर की ऊँचाई पर और पहाड़ी की चोटी पर है.

बात तब की है जब बिशन सिंह बेदी के ही कैंप में युवराज ने अपने जीवन की पहले सेंचुरी बनाई थी. और उसी वक्त उन्हें इस बात का अहसास हुआ कि क्रिकेट की ऊंचाईयों पर पहुँचने पर क्या आनंद मिल सकता है. उस वक्त युवराज सिंह ने सेंचुरी क्या बनाई. बिशन सिंह बेदी को बल्लेबाज़ों के लिए नया नियम बनाने को मजबूर होना पड़ा.

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युवराज अपनी आत्म कथा में लिखते हैं. की 100 रन पूरे करने के बाद मैंने दो छक्के जड़े और पाजी ने कैंप में नया नियम लागू कर दिया. उन्होंने कहा कि अब से छक्का मारने का मतलब आउट माना जाएगा. क्योंकि चैल मेम अगर आप गेंद मैदान से बाहर मारते हो तो गेंद हज़ारों फुट नीचे घाटी में पहुँच जाती थी और तब इस गेंद की कीमत करीब 300 रुपये हुआ करती थी.

जूनियर क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन करने का पुरस्कार युवराज को मिला और 1997 में उन्हें पंजाब की तरफ से पहला प्रथम श्रेणी मुक़ाबले खेलने के लिए चुन लिया गया.

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