पश्चिम बंगाल का राजमार्ग जानलेवा, पढ़िए ये खबर

  • 2018 में सड़क हादसों में गई 5711 की जान

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में पांच में से तीन से अधिक भयावह दुर्घटनाएं राज्य के राजमार्गों (नेशनल हाइवे) पर होती हैं. ये खुलासा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट में हुआ है. विशेषज्ञों ने इसके लिए वाहनचालकों की लापरवाही, वाहनों की तेज गति और अवैध पार्किंग को जिम्मेदार ठहराया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2018 में राज्य में हुए सड़क हादसों में से 62 फीसदी राष्ट्रीय राजमार्गों पर घटित हुए. 2018 में राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में 5,711 लोग मारे गए. इनमें से 63 फीसदी लोग राजमार्ग पर हुए हादसों में मारे गए. पश्चिम बंगाल में 2,998 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग और 3,693 किलोमीटर राज्य राजमार्ग हैं.

पश्चिम बंगाल यातायात विभाग के एडीजी आईपीएस विवेक सहाय का इस पर कहना है कि हम अभी डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं, लेकिन बंगाल में सड़क दुर्घटनाएं 2018 में निरंतर जागरुकता अभियान और अभियोजन के कारण कम हुई हैं. इस साल आंकड़े काफी कम होंगे.

रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में बंगाल में 12,705 दुर्घटनाएं हुईं. ये लगभग 13.4 दुर्घटना प्रति लाख है.2018 की रिपोर्ट कहती है, बंगाल में प्रत्येक 100 दुर्घटनाओं में 45 लोग मारे गए. ये अभी भी एक उच्च आंकड़ा है, भले ही डेटा 2015 और 2018 के बीच साल-दर-साल गिरावट को दर्शाता है. पश्चिम बंगाल सड़क दुर्घटनाओं के मामले में पूरे देश में 15वें पायदन पर है. 2009 हेड-ऑन टक्कर थे. 1,217 हिट-एंड-रन, 1,744 हिट-टू-बैक दुर्घटना हुई है.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, दो कारणों से राजमार्ग पर अधिक घातक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं.एक बेलगाम गति है.एक्सप्रेस-वे की औसत 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति सीमा है, राष्ट्रीय राजमार्गों की 100 किमी प्रति घंटे की गति सीमा है.राज्य राजमार्गों की गति 80 किलोमीटर प्रति घंटा है.बहुत कम ही वाहनचालक गति सीमा का पालन करते हैं.दूसरा कारण है. भारी वाहनों को सड़क किनारे अवैध तरीके‌ से पार्क किया‌ जाना है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018 में बंगाल में दुर्घटना से संबंधित चोटों की संख्या चार साल के उच्च स्तर पर है.2018 में बंगाल की सड़कों पर 11,997 लोग घायल हुए जबकि 2015 में 11,794, 2016 में 11,859 और 2017 में 10,091 लोग घायल हुए.

हिन्दुस्थान समाचार / ओम प्रकाश

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