कोरोना की वजह से कम हो रही प्रयागराज की गर्मी

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प्रयागराज. साल 2019 में जिले में अधिकतम पारा 46 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया था. डीएम के आदेश पर बीएसए ने नर्सरी स्कूलों का समय परिवर्तित कर 7 से 11 कर दिया था, स्कूलों को बंद किए जाने की मांग भी उठने लगी थी.

लेकिन इस वर्ष 2020 में 26 अप्रैल को अधिकतम तापमान 33.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. रात में एससी और कूलर चलाने की आवश्यकता महसूस नहीं हो रही है. न दिन में अप्रैल जैसी तपिश है और न ही रात में. सुकून की नींद के लिए पंखे की हवा ही काफी है. कोरोना संक्रमण की वजह से लॉकडाउन के बाद स्कूल-कॉलेज तो बंद हैं ही.

सवाल यह है कि अप्रैल के तापमान में इतना अंतर आखिर क्यों?
मौसम विज्ञानियों का मानना है कि इसके पीछे एक अहम वजह लॉकडाउन है. बाजार, फैक्ट्री और कारखाने सब बंद हैं, न तो एसी चल रहा है और न ही गाड़ियां. इसका सीधा असर स्थानीय तापमान पर पड़ा है.

इविवि भूगोल विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. बीएन मिश्र कहते हैं कि भूमध्य सागर से हर शीतोष्ण कटबंधीय (Temperate Zone) चक्रवात वर्ष उठता है. जिससे पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो जाता है. जिसके प्रभाव से पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश होती है. यह तापमान बढ़ने के साथ मार्च के अंत या अप्रैल के पहले हफ्ते में खत्म हो जाता है.

लॉकडाउन में कारखाने, वाहन इत्यादि बंद होने से तापमान नहीं बढ़ पा रहा है. पश्चिमी विक्षोभ अब तक सक्रिय है. लिहाजा मौसम ठंडा है क्योंकि जैसे ही तापमान बढ़ता है विक्षोभ सक्रिय होकर बारिश कर देता है.

भूगोल विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एचएन मिश्र कहते हैं कि अमूमन यह तापमान मार्च में दर्ज होता था. अप्रैल अंत तक तापमान अक्सर 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर चला जाता था. लेकिन पिछले एक दशक में अप्रैल इतना ठंडा बीत रहा है.

भूगोल विभाग के अध्यक्ष प्रो. एआर सिद्दीकी कहते हैं कि कम क्षेत्रफल में अधिक आबादी और गंगा-यमुना का किनारा होने के कारण प्रयागराज प्रदेश के सबसे गर्म शहरों में से एक हैं. सिविल लाइंस हो, चौक या फिर कटरा बाजार, एसी बंद हैं और वाहन भी नहीं चल रहे. घरों में भी लोग कोरोना के डर से एसी चलाने से परहेज कर रहे हैं.

मौसम विज्ञानिकों का मानना है कि मई मध्य तक विक्षोभ ऐसे रहा तो इसका असर मानसून पर पड़ सकता है. इस बार बेहतर मानसून होने की संभावना है पर विक्षोभ की वजह से मानसून कमजोर पड़ सकता है.

हिन्दुस्थान समाचार / मनोज निगम