पूर्वांचल में गंगा का विकराल रूप, डर के साए में जीने को मजबूर ग्रामीण, 500 मीटर खेती गंगा में समाई

भदोही, 20 सितम्बर. पूर्वांचल में गंगा का बढ़ाव लगातार जारी है. इस वजह से वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर के कछारी गांवों की स्थिति खौफनाक हो गई है.

सीतामढ़ी स्थित केंद्रीय जल आयोग के अनुसार शुक्रवार को दो सेंटीमीटर प्रतिघंटे की गति से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है.

जिले के छेछुवा गांव में तेजी से कटान हो रहा है. यहां गंगा गांव को निगलने को बेताब है जिसकी वजह से किसानों की नींद उड़ गयी है.

भदोही में 17 बाढ़ चौकियां स्थापित की गईं हैं. दर्जन भर कछारी गांवों में गंगा का पानी पहुंच चुका है. गंगा का पानी खतरे के निशान पर पहुंच चुका है अगर और अधिक पानी बढ़ा तो कई गांव डूब जाएंगे.

सीतामढ़ी स्थित केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सुबह की रिडिंग में गंगा प्रति घंटे दो सेंटीमीटर के गति से बढ़ रही है. 2013 में गंगा का सर्वाधिक जलस्तर 80 मीटर 200 सेंटीमीटर था.

शुक्रवार की रिडिंग में 80 मीटर 120 सेंटीमीटर तक पहुंच गया है. पुराने रिकार्ड से गंगा सिर्फ एक मीटर पीछे हैं, लेकिन जल स्तर के बढ़ाव की जो गति है उसे लगता है वह रिकॉर्ड टूट जाएगा.

मध्यप्रदेश की टोंस नदी और गंगा का जलस्तर बढ़ने की गति दो-दो सेंटीमीटर है. गंगा की बढ़ती हुई गति की वजह से कछारी गांवों के लोगों की नींद उड़ गयी है.

लेकिन अभी सिर्फ तराई हिस्सों में पानी घुसा है, यही गति रही तो जल्द ही सैकड़ों गांवों में पानी घुसने से लोग पलायन को बाध्य होंगे. जिला प्रशासन की तरफ से ऐहतियात बरती जा रही है.

बाढ़ को देखते हुए 17 चौकियां स्थापित की गईं हैं. मोटर बोट के साथ पीएसी जवानों को भी तैनात किया गया है. लेकिन किसानों की हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है. जिसकी वजह से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है.

सीतामढ़ी में उड़िया बाबा का आश्रम पानी से घिर गया है. उस इलाके में मोटरवोट चल रही है. रामपुर गांव में भी पानी घुस गया है. इटहरा, मवैयाथान सिंह, कलिक मवैया, बसगोती मवैया, घमौरी, कूड़ी, बहपुरा, कलातुलसी, हरिरामपुर जैसे दर्जनों तटीय इलाकों में पानी घुस गया है.

गंगा कटान की वजह से छेछुवा गांव खौफनाक लहरों में समाने को बेताब है जिसकी वजह से गांव के लोग डरे हुए हैं. गांव के निवासी वतन सिंह ने बताया कि गंगा 500 मीटर से अधिक जमीन निगल चुकी हैं, जिसकी वजह से गांव के किसान और आम लोग डर के साए में हैं.

छेछुवा और भोर्रा गांव में कटान की कहानी हर साल की है लेकिन कोई सरकार और नेता इस पर कभी ध्यान नहीं दिया. हरिहरपुर गांव कटान में समाहित हो गया अब हमारी बारी है.

गांव के लोगों में सरकारों और जनप्रतिनिधियों के साथ जिला प्रशासन के खिलाफ काफी गुस्सा है. बाबा गिरी बताते हैं कि 1998 के बाद इस तरह की यह पहली बाढ़ लोगों को देखने को मिल रही है.

समाजसेवी राहुल दुबे ने बताया कि कोनिया में गंगा किसानों के लिए अभिशाप हैं. छेछुवा और भोर्रा गांव कटान की जद में हैं. कटान की वजह से किसानों की सैकड़ों एकड़ जमीन गंगा की लहरों में समा गई है और समा रही है लेकिन इस समस्या पर किसी सरकार ने ध्यान नहीं दिया है.

गंगा में समाई जमीनों का भी किसानों को मुआवजा नहीं मिला है. बाढ़ से काफी बड़े परिक्षेत्र की फसलें डूब गई हैं. जिस गति से कटान हो रहा है उससे छेछुवा गांव के गंगा में डूबने की सम्भावना है. हिन्दुस्थान समाचार/प्रभुनाथ

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