कृषि वानिकी के लिए अत्‍यंत प्रासंगिक है ‘वोकल फॉर लोकल’

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कृषि वानिकी किसानों को उद्योग जगत से जोड़ने के तरीकों पर चर्चा करने और प्रजातियों का सही चयन करने में किसानों की सहायता करने के लिए कार्यान्वित करने वाले राज्यों को जागरूक करने के लिए एक वेबिनार आयोजित किया गया.

कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग में सचिव संजय अग्रवाल ने वेबिनार का उद्घाटन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का ‘वोकल फॉर लोकल’ आह्वान कृषि वानिकी के लिए भी अत्‍यंत प्रासंगिक है. अग्रवाल ने कहा कि कृषि वानिकी कुछ महत्वपूर्ण वस्तुओं में आयात निर्भरता को कम करने के लिए उद्योग जगत को कच्चे माल की आपूर्ति बढ़ाने में अहम योगदान दे सकती है.

उन्होंने कहा कि कृषि वानिकी की पूर्व धारणा, जिसका अर्थ केवल इमारती लकड़ी की प्रजातियां है, पर किसानों और उद्योग जगत के दृष्टिकोण से नए सिरे से गौर करने की जरूरत है. चूंकि इमारती लकड़ी के पेड़ों की परिपक्वता अवधि लंबी होती है, इसलिए इनसे किसानों को प्रतिफल या रिटर्न काफी देर से मिलता है.

अग्रवाल ने कहा कि कई ऐसे उभरते क्षेत्र या सेक्‍टर हैं जो किसानों को त्वरित रिटर्न सुनिश्चित करने के साथ-साथ उद्योग जगत की आवश्यकताओं को भी पूरा करेंगे, जिनमें औषधीय एवं सुगंधित पौधे, रेशम, लाह, कागज व लुगदी, जैव ईंधनों के उत्पादन के लिए पेड़ जनित तेल बीज या ति‍लहन, इत्‍यादि शामिल हैं.

उन्होंने किसानों का कल्याण सुनिश्चित करने हेतु उन्‍हें अधिकतम पारिश्रमिक सुनिश्चित करने के लिए कृषि क्षेत्र में लागू कि‍ए गए विभिन्न सुधारों के बारे में विस्तार से बताया. इन सुधारों में 1.63 लाख करोड़ रुपये का परिव्यय, सही मायनों में राष्ट्रीय बाजार स्थापित करने के लिए कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन व सुविधा) अध्यादेश 2020 लाना और कृषि उपज की ई-ट्रेडिंग प्रदान कराना सराहनीय कदम हैं.

उन्होंने कृषि वानिकी के कई उपयोगों पर प्रकाश डाला जिनमें किसानों के लिए अतिरिक्त आय, विशेषकर महिला एसएचजी के लिए आजीविका के साधन के रूप में नर्सरी, हरा चारा, फलीदार प्रजातियों के रोपण कर उर्वरकों की आवश्यकता को कम करना, जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कार्बन का पृथक्करण (अलग करना), इत्‍यादि शामिल हैं.

वेबिनार में राज्यों को सलाह दी गई कि वे फसलों की तर्ज पर ही रोपण-पूर्व एवं रोपण से लेकर कटाई तक अनुबंध पर खेती को प्रोत्साहित करें. मौजूदा एवं संभावित उद्योग दोनों को ही हब के रूप में रेखांकित किया जाना चाहिए और उनके ईर्द-गिर्द विभिन्‍न गतिविधियों की योजना बनाई जानी चाहिए. बहुउद्देशीय प्रजातियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. इससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने के विजन को साकार करने में काफी मदद मिलेगी.

हिन्दुस्थान समाचार/अजीत