सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले में उज्बेकिस्तान होगा ‘भागीदार राष्ट्र’

फरीदाबाद, 07 नवम्बर (हि.स.). अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान कायम कर चुके सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला-2020 में उज्बेकिस्तान ‘भागीदार राष्ट्र’ होगा. हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उज्बेकिस्तान के राजदूत के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में ‘उज्बेकिस्तान आकर्षक राष्ट्र’ के रूप में शामिल होना चाहता है.

उज्बेकिस्तान और भारत के बीच सदियों पुराने राजनयिक और ऐतिहासिक संबंध हैं और उज्बेक लोगों में भारत के प्रति सद्भावना और स्नेह है. सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला में उज्बेकिस्तान की भागीदारी से न केवल दोनों देशों के बीच पुराने ऐतिहासिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि मेले में बहुत सारे रंग और उत्सव भी जुड़ेंगे.यह मेला अगले वर्ष एक फरवरी से शुरू होगा .

शिल्पकारों के लिए है बेहतर मंच
अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेला शिल्पकारों के लिए एक बेहतर मंच होता है. यहां वह अपनी कलाकृतियां देश ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटकों के समक्ष रखते है, जिनसे उन्हें बड़ी पहचान मिलती है. वैसे भी मेले में हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र के अलावा दूसरे देशों के शिल्पकार भी आते है और उनके लिए यह मेला एक माध्यम होता है अपनी कला का प्रदर्शन करने का इस बार भी मेले में दुनियाभर के शिल्पकार हिस्सा लेंगे.

चौपाल पर बिखरती हैं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की छठा
सूरजकुंड मेले की चौपाल पर सुबह से लेकर रात तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की छठा बिखरी रहती है. पंजाबी, महाराष्ट्र, हरियाणवीं, राजस्थानी, उत्तरप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों के कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते है वहीं विदेशी कलाकार भी अपनी संस्कृति से ओत-प्रोत नृत्य प्रस्तुत करके लोगों का मन मोहते है.

मेले में आने वाले दर्शकों का जमावड़ा चौपाल पर ही ज्यादा रहता है क्योंकि यहां उन्हें भारत के साथ-साथ दूसरे देशों की संस्कृति के भी साक्षात दर्शन होते है.

पहली बार 1987 में लगा था मेला
सूरजकुंड शिल्प मेले का आयोजन पहली बार वर्ष 1987 में भारत हस्तशिल्प, हथकरघा, सांस्कृतिक विरासत की समृद्धि एवं विविधता को एक मंच पर प्रदर्शित करने के उद्देश्य से किया गया था.

इस मेले का आयोजन हरियाणा टूरिज्म और टेक्स्टाइल, पर्यटन, कल्चर एंड एक्सटर्नल अफेयर्स मंत्रालय मिलकर करते हैं. मेले का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण भारत के कल्चर और ट्रेडिशन को दिखाना होता है.

हिन्दुस्थान समाचार/मनोज/सुभाष

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