क्यों बैन होनी चाहिए अनुष्का शर्मा की Pataal Lok, ये है यूजर्स की राय

लॉकडाउन में थिएटर्स सिनेमा हॉल सबकुछ बंद पड़ा है..ऐसे में इंटरटेनमेंट का कोई जरिया बचा है तो वो  ओटीटी प्लेटफॉर्मस है. ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजॉन प्राइम पर हाल ही में वेब सीरीज पाताल लोक रिलीज हुई.

सीरीज को क्रिटिक्स से अच्छा रिव्यूज भी मिले हैं, जिसे देखकर आडियंस भी इस सीरीज को देखने के लिए एक्साइटेड होने लगी.

हालांकि जब आडियंस ने इस सीरीज को देखा तो कइयों को ये सीरीज नहीं पसंद आई और सीरीज पर कई तरह के आरोप लगने लगे. ट्विटर पर पिछले दिनों बैन पाताल लोक काफी ट्रेंड किया.

शो के कुछ सीन्स में हिंदू विरोधी संस्कृति दिखाने और गोमांस खाने का महिमामंडन करने पर नेटिजन्स ने अनुष्का शर्मा और शो की कड़ी निंदा की है.

चलिए सबसे पहले बताते हैं सीरीज पर यूजर्स ने क्या लिखा

एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “इस तरह की हिंदू-विरोधी सीरीज को अब बढ़ावा नहीं देना चाहिए. चलिए #BanPaatalLok ट्रेंड करते हैं. हिंदुओं का ब्रेनवॉश किया जा रहा है और वे अपने ही लोगों के खिलाफ जा रहे हैं. बैन करने के लिए एक टैग के साथ ट्वीट करें. यह शो हिंदू भावनाओं को आहत कर रहा है.”

एक अन्य यूजर लिखा- “मूल रूप से पाताल लोक हिंदू-विरोधी, ब्राह्मण-विरोधी शो है. लीला से लेकर पाताल लोक जैसी वेब सीरीज लोगों को हिंदू फोबिक बनाने के लिए एक निरंतर प्रयास है.”

खैर अब यूजर्स के इतने कमेंट्स के बाद हमें भी लगा कि हमें इस सीरीज के उन सीन्स पर बात करनी चाहिए जो हमारी नजर पर आपत्तिजनक थे.

सीरीज हिंदू विरोधी या सांप्रदायिक विरोध करने की मनसा से ना बनाई गई हो, लेकिन बावजूद इसके कुछ सीन्स है जो आपत्तिजनक है. यही वजह भी है कि लोग इस पर आक्रोश प्रकट कर रहे हैं.

सीरीज का नाम पाताल लोक है. हमारे शास्त्रों में दुनिया को तीन लोक में बांटा गया है स्वर्ग लोक, धरती लोक और पाताल लोक.

स्वर्ग लोक जहां देवता रहते हैं, धरती लोक जहां आम लोग रहते हैं और तीसरा पाताल लोक, जहां राक्षस यानी क्राइम करने वाले लोग रहते हैं.

कॉन्सेप्ट काफी यूनिक है लेकिन सीरीज में इन तीनों लोकों को इस तरह नहीं बांटा गया है बल्कि सांप्रदायिकता के आधार पर बांट दिया गया है, माना ओटीटी प्लेटफॉर्मस पर कंटेंट पर कोई रिसट्रेक्शन नहीं होते. पर क्या 2020 में ये लॉजिक काम करता है कि स्वर्ग लोक में सिर्फ हिंदूत्व का राज है जो धरती लोक और पाताल लोक पर अत्याचार करता है और दलित मुस्लिमों के नसीब में पाताल लोक ही है क्योंकि उन्हें वहां रहने के लिए स्वर्ग लोक के लोगों ने मजबूर किया है.

सीरीज के दूसरे ही एपिसोड में चारों क्रिमिनल में से एक फीमेल क्रिमिनल को महिला कॉन्सटेबल गंदी गंदी गालियां देती है नेपाली कहती है.

आप जानते हैं आज कितने पूर्वी भारत के लोगों को चीनी नेपाली कहकर चिढ़ाया जाता है यहां तक कि इन दिनों उन्हें कई लोग कोरोना भी कहने लगे हैं ऐसे में सीरीज में इस चीज को बढावा देना कितना गलत है.

दूसरी बात जो शो में आपत्तिजनक थी वो ये कि शो में जातिवाद को ग्लोरिफाई किया गया है. सीरीज में क्रिमिनल्स जातिवाद का शिकार दिखाए गए. ये देखकर लगा कि ये कहानी 2020 में नहीं बल्कि आजादी  से पहले बननी चाहिए थी.

कुछ ऐसा ही मुस्लिम समुदाय के साथ दिखाया गया है. मुस्लिम है तो टैरिस्ट ही होगा. मुस्लिम पुलिस ऑफिसर को उसके डिपार्टमेंट वाले अलग नजर से देखते हैं क्योंकि वो मुस्लिम है.

लजीबीटी कम्यूनिटी की तो कोई रिसपेक्ट ही नहीं रखी गई. पुलिसवाला सबके सामने उसके कपड़े खोलता है. उसे दूसरे लड़कों के साथ खुले में नहाने को मजबूर करना, लड़का जमुना पार से है तो नशेड़ी ही बनेगा जैसे बहुत सारे सीन्स है जो आपत्तिजनक है.

पाताल लोक का ट्रेलर आया तो लगा था इस सीरीज में क्राइम की वो दुनिया दिखाई जाएगी जहां क्रिमिनल  किसी जाति धर्म या कास्ट से जुड़ा नहीं होता लेकिन इसके उल्ट सीरीज में समुदायों को पाताल लोक स्वर्ग लोक और धरती लोक में बांट दिया गया.

मेकर्स ने सीरीज को बनाने में काफी मेहनत की है लेकिन इसकी राइटिंग कई जगह गलत धारणा देती है जो कि गलत है.

यहां सोचने वाली बात ये भी है कि क्या हिंदुत्व पर अंगुली उठाना, उसे किसी भी गुनाह के लिए गुनेहगार बना देना मेकर्स और राइटर्स के लिए सबसे आसाना तरीका है. इसे पहले नेटफिल्किस की सीरीज लैला में भी ऐसा ही कुछ दिखाया गया था इसके अलावा भई कई सीरीज है जिनमें इस तरह से कास्टजिम को ग्लोरिफाई किया गया है ये सीरीज ओटीटी प्लेटफॉर्म पर है जहां दुनिया का कोई भी इंसान इन्हें देख सकता है ऐसे में उनके मन में हमारे देश के प्रति किस तरह की धारणा बनेगी.

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