सोशल मीडिया पर आपकी मौजूदगी बना सकती हैं आपको डिप्रेशन का शिकार

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नई दिल्ली. डिप्रेशन में जाने की कोई उम्र नहीं होती है. किशोर, युवा, प्रौढ़ उम्र की किसी भी डिप्रेशन का शिकार हो सकता है. हाल ही में देखने को मिल रहा है कि लोग डिप्रेशन के कारण जान तक के दे रहे हैं. टेलीविजन से करियर शुरू कर बॉलीवुड में स्थापित होने वाले अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने रविवार को खुदकुशी कर ली. इसके पीछे का कारण भी डिप्रेशन को ही माना जा रहा है.

इस साल ये बिमारी ज्यादा देखने को मिल रही है. वैसे तो डिप्रेशन  होने के कई कारण हो सकते हैं. लोग पैसों की तंगी के कारण, तो कई काम की वजह से या फिर अपनी निजी जिंदगी के कारण परेशान है. जिसकी वजह से धीरे- धीरे वो डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं और सुसाइड जैसा कदम उठा लेते हैं.

इसके अलावा डिप्रेशन का एक मुख्य कारण है फोन औप सोशल मीडिया. आजकल लोग फोन का और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कुछ ज्यादा ही करने लग गए हैं. जिसके कारण वो अपने अपनों से ही दूर होते जा रहे हैं.

फोन और सोशल मीडिया के कारण दूरी बढ़ रही है. जो कि लोगों को उदास कर रही है.  उदासी डिप्रेशन का एक बड़ा संकेत है. फोन और सोशल मीडियो लोगों को अकेले रहने की आदात डाल देता है. जिसके बाद वो शख्स लोगों के बीच रहने और उनसे बातें करने से कतराने लग जाता है.

जिसके बाद शख्स को अकेलापन पसंद आने लग जाता है. उसे अहसास तक नहीं होता है कि वो डिप्रेशन में जा रहा है. डिप्रेशन में व्यक्ति अकेला रहना ज्यादा पसंद करता है. किसी के बीच रहने, बात करने का मन नहीं होता. वह अपना एक आभासी जोन बना लेता है और उसी में रहना चाहता है.

डिप्रेशन के लिए जिम्मेदार सोशल मीडिया

शोधकर्ताओं का मानना है कि सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म की वजह से हमारा लोगों से फेस-टू-फूस इंटरेक्शन कम होता जा रहा है. यह न सिर्फ व्यवहारिक रूप से हमें प्रभावित कर रहा है, बल्कि हमें बीमार भी बना रहा है. शोधकर्ता डिप्रेशन और कई शारीरिक समस्याओं की वजह के लिए भी इसे ही जिम्मेदार ठहराते हैं. सोशल मीडिया इंसानों में पनप रही निराशा और हताशा का एक बड़ा कारण है. 

चिंता और तनाव : सुबह उठते ही मोबाइल हाथ में लिया तो फोन मैसेजेस, ई-मेल्स, रिमांडर, इंस्टाग्राम पोस्ट्स आदि से भरा होता है, जो चिंता और तनाव की वजह बन सकता है. नींद से उठते ही अगर सोशल मीडिया चेक करने लगते हैं तो दिमाग उसी में बंध जाता है और गैर-जरूरी जानकारियों से भर जाता है. दिन की शुरुआत तनाव और चिंता से करना सेहत के लिए ठीक कतई नहीं है.

डिप्रेशन : सोते और जागते मोबाइल देखने वालों के साथ तो स्थिति और खराब हो सकती है. नियमित रूप से ऐसा रूटीन फॉलो करने वाले डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं. सुबह उठते ही सोशल मीडिया स्टेटस आदि देख लेने से कई बार लोग तुलना में फंस जाते हैं. दूसरों की जीवनशैली देखकर परेशान हो जाते हैं और खुद से तुलना करने लगते हैं, जिसकी वजह से डिप्रेशन की स्थिति तक आ सकती है.