चीन को एक और झटका, हाथ से फिसला कानपुर-आगरा मेट्रो प्रोजेक्ट

नई दिल्ली. भारत (India) लगातार चीन (China) को आर्थिक मोर्चे पर झटके दे रहा है. पिछले महीने भारत और चीन के सैनिकों के बीच लद्दाख सीमा के पास हुई हिंसक झड़प के बाद भारत सरकार ने टिक टॉक (Tik Tok) समेत 59 चीनी ऐप्स (Chinese Apps) पर प्रतिबंध लगा दिया.

अब उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूपीएमआरसी) ने चीन को एक और झटका देते हुए कानपुर और आगरा मेट्रो प्रॉजेक्ट के लिए चाइनीज कंपनी का टेंडर रिजेक्ट कर दिया है.

यूपीएमआरसी (UPMRC) ने आगरा और कानपुर में मेट्रो ट्रेनों (रोलिंग स्टॉक्स) की सप्लाई, टेस्टिंग और कमिशनिंग के साथ-साथ ट्रेन कंट्रोल और सिग्नलिंग सिस्टम का करार भारतीय कंपनी मैसर्स बॉम्बार्डियर ट्रांसपोर्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को दिया है. ये कनाडा (Canada) की कंपनी है. इसी कंपनी ने बिड प्रक्रिया में सबसे कम बोली लगाई थी.

चीन की कंपनी सीआरआरसी नैनजिंग पुजहेन लिमिटेड ने भी टेंडर भरा था, लेकिन बिड में कम बोली लगाने वाली बॉम्बार्डियर ट्रांसपोर्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (Bombardier Transport India Private Limited) को ये ठेका मिल गया. ये एक भारतीय कंसोर्टियम (कंपनियों का समूह) है.

कानपुर और आगरा दोनों ही मेट्रो परियोजनाओं के लिए कुल 67 ट्रेनों की सप्लाई होगी, जिनमें से हर ट्रेन में 3 कोच होंगे, जिनमें से 39 ट्रेनें कानपुर और 28 ट्रेनें आगरा के लिए होंगी. एक ट्रेन की यात्री क्षमता लगभग 980 होगी यानी हर कोच में लगभग 315-350 यात्री यात्रा कर सकेंगे.

आगरा और कानपुर मेट्रो परियोजनाओं को मिलने वाली अत्याधुनिक ट्रेनों की सप्लाई कंपनी के सावली (गुजरात) स्थित प्लान्ट से होगी. केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ मुहिम को भी इससे ताकत मिलेगी.

लॉकडाउन के बाद कानपुर में एक बार फिर से पूरे जोर के साथ सिविल निर्माण कार्य शुरू किया गया. रोलिंग स्टॉक और सिग्नलिंग सिस्टम के टेंडरिंग की प्रक्रिया का पूरा होना एक बड़ी उपलब्धि है. कानपुर और आगरा की जनता का मेट्रो सेवाओं का सपना भी अब जल्द ही पूरा होगा.

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