अब यूनिवर्सिटी के कॉन्वोकेशन-दीक्षांत समारोह में स्टूडेंट को पहननी होगी ये ड्रेस

आमतौर पर पढ़ाई के बाद डिग्री लेने का शौक हर स्टूडेंट को होता है. ब्लैक गाउन के साथ ब्लैक हैट में फोटो खिंचवाना शायद ही किसी को नापसंद हो.

मगर अब से कोट पुराने जमाने की बात होने जा रही है. दरअसल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने सर्कुलर जारी कर कहा है कि भारत की अलग अलग यूनिवर्सिटी में होने वाले कॉन्वोकेशन प्रोग्राम यानी दीक्षांत समारोह में स्टूडेंट्स को अब काला कोट नहीं पहनना होगा.

ब्लैक गाउन पहनना अब बीते जमाने की बात होने जा रही है. मोदी सरकार चाहती है कि दीक्षांत समारोह में अपनी डिग्री लेने के लिए स्टूडेंट्स भारतीय परिधानों में पहुंचे न की वेस्टर्न पोशाक में.

इसे लागू करने के लिए यूजीसी की ओर से सर्कुलर भी जारी किया जा चुका है. यूजीसी ने सभी यूनिवर्सिटी को कहा है कि वो दीक्षांत समारोह में ट्रेडिशनल कपडें पहनने पर जोर दें.

आयोग ने कहा है कि अब से दीक्षांत समारोह में हैंडलूम से बने कपड़ों को पहनने को बढा़वा दिया जाए. इसके पीछे ये भी तर्क दिया गया है कि हैंडलूम के कपड़ों को इस्तेमाल करने से भारतीयता को ही गौरव मिलेगा. आयोग ने ये भी कहा है कि इस फैसले को लेकर यूनिवर्सिटी से एक्शन टेकन रिपोर्ट भी मंगाई गई है.

हर यूनिवर्सिटी चाहे वो सरकारी हों या प्राइवेट उन्हें इस फैसले को लागू करना होगा. वैसे इससे पहले भी मोदी सरकार पारंपरिक परिधानों को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाती रही है.

पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने दीक्षांत समारोह के दौरान पारंपरिक परिधानों को पहनने को लेकर काफी समर्थन किया था.

कई संस्थानों ने इस फैसले को लेकर लागू भी किया था. इसमें आईआईटी बॉम्बे, जैसे कई इंस्टीट्यूट में इसे लागू किया गया है. इन इंस्टीट्यूट में कुर्ता-पायजामा और साडी़ को दीक्षांत समारोह की ड्रेस बनाया था.

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