Ujda Chaman Review : उजड़ी हुई है उजड़े चमन की कहानी

फिल्म  – उजड़ा चमन

डायरेक्टर –  अभिषेक पाठक

स्टारकास्ट – सनी सिंह, मानवी गागरु

दिल की बातें करते है लोग, पर अफसोस के महोब्बत फिर भी चेहरे से किया करते हैं. यही फिल्म उजड़ा चमन का सार है. फिल्म को अभिषेक पाठक ने डायरेक्ट किया है. लीड रोल में है सोनू के टीटू यानी की सनी सिंह और फीमेल लीड में है मानवी गागरु.

फिल्म की कहानी

कहानी है दिल्ली यूनिवर्सिटी में हिंदी प्रोफेसर की नौकरी करने वाले चमन की. जिनके चेहरे से उम्र का अंदाजा लगाना पाना थोड़ा मुश्किल है. क्योंकि कहने को चमन अभी 30 के हुए है, लेकिन अपने गंजेपन की वजह से 40 से एक दिन कम नहीं लगते.

गंजेपन का कोई भी रिजन हो सकता है, लेकिन जिंदगी पर ये क्या असर डालता है ये उजड़ा चमन देखकर समझ आ जाता है. लड़का गंजा है तो शादी के लिए लड़की नहीं मिल रही, कॉलेज में बच्चे उज़़ड़ा चमन टक्लू कहने से बाज नहीं आते, तो घर पर माता पिता पड़ोसियों के तानों से परेशान है, इन सब के बीच चमन को टिंडर पर मिलती है एक लड़की अप्सरा.

अब डेटिंग साइट पर कहीं नहीं लिखा ना कि जो जैसा दिख रहा है वो वैसा ही होगा. फिर क्यों हम बिना किसी मिले ख्वाब सजाने लगते है. अब ख्वाब सजा लिए है तो झेलिए भी.

पहली मुलाकात, ल़ड़की और लड़के दोनों के सपने चकना चूर, क्योंकि लड़की को  डैसिंग लडका चाहिए और लड़के को चाहिए स्लीम ट्रिम गर्ल.

लेकिन लड़की ओवर वेटिड और लड़का गंजा है. इसके बाद इनकी कहानी ने क्या मोड़ लिया. ये जानने के लिए आपको एक बार थिएटर तो जाना ही पड़ेगा.  

आउटर ब्यूटी को तव्ज्जो देने वाले समाज में गंजापन, मोटापा, कम हाइट, सांवला होना कितनी बड़ी समस्या है ये कहे ना कहे जानते सभी है, और यही इस फिल्म में समझाने की कोशिश भी की गई है.

डायरेक्शन और स्क्रिप्टिंग

 फिल्म को देखकर लगता है कि मैसेज समझाने के लिए सहारा एक ऐसी कहानी का लिया गया. जिसकी खुद की परते आपस में उलझी हुई है. कई जगहों पर फिल्म गंजेपन पर कम शादी पर ज्यादा लगती है.

घुम फिर कर राइटर शादी के टॉपिक पर आ जाता है. फिल्म का प्लॉट बिल्कुल फ्लैट है. समझ नहीं आता कब कौन सी चीज और क्यों हुई. फिल्म कन्नड़ी फिल्म ओंडू मोट्टेया काठे का हिंदी रीमेक है, पर लगता है कि फिल्म की भाषा बदलने के साथ ही फिल्म की कहानी में भी चेंजस किए गए जो सही नहीं थे और कमियां सिर्फ कहानी में ही नहीं डायरेक्शन में नजर आती है. कुछ सीन्स को बेवजह खींचा गया.

एक्टिंग

फिल्म की लेंथ भी लंबी है. फिल्म की एक बड़ी कमी फिल्म का लीड कैरेक्टर है यानी कि चमन. किसी भी फिल्म में कुछ भी बुरा हो लेकिन अगर लीड रोल आकर्षक है तो आप फिल्म को जरुर देखना चाहोगे. लेकिन यहां सबसे बड़ी कमी चमन में ही है.

फिल्म के एंडिग सीन तक ये समझना मुश्किल होता है कि चमन किस तरह का इंसान है. वो स्टूडेंट्स से बुली होता, तो वही दूसरी तरफ फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट के प्यार में पड़ जाता है. ऐसे में चमन कंफ्यूज आत्मा से ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता.

रिव्यू

ओवरओल कमजोर कहानी के साथ एक सोशल मैसेज देने की कोशिश की गई है. लेकिन वो मैसेज लोगों तक तभी पहुंच पाएगा. जब कोई पूरी फिल्म बैठकर देख पाएगा.

ऐसे में इस फिल्म को हम देंगे 5 से 2.5 स्टार

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