मेट्रो रेल हादसा प्रबंधन के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज

कोलकाता. कोलकाता मेट्रो में शनिवार की शाम हुए हादसे में सजल कांजीलाल नाम के 66 वर्षीय वृद्ध की दर्दनाक मौत हो गई थी. इस मामले में पुलिस ने दो प्राथमिकी दर्ज की है.

शेक्सपियर सरणी थाने में मृतक के परिजनों ने मेट्रो रेल प्रबंधन के खिलाफ लापरवाही का आरोप लगाते हुए लिखित शिकायत दर्ज कराई थी. जिसके आधार पर पुलिस ने दो मामले दर्ज किए हैं. पहला मामला गैर इरादतन हत्या का है और दूसरा लापरवाही बरतने का है.

भारतीय दंड विधान की धारा 304 ए और 34 के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है. पुलिस ने मेट्रो चालक, गार्ड, ड्यूटी पर तैनात रहने वाले रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और अन्य जिम्मेवार अधिकारियों से पूछताछ करने की तैयारी कर ली है.

मेट्रो रेल प्रबंधन ने भी आंतरिक जांच शुरू कर दी है. घातक मेट्रो के चालक और गार्ड को सस्पेंड कर दिया गया है. मेट्रो रेलवे महाप्रबंधक पीसी शर्मा के निर्देश पर उच्च स्तरीय जांच शुरू की गई है. इसके जरिए रविवार को उस चालक का बयान रिकॉर्ड किया गया है.

जो मेट्रो चला रहा था. इसके अलावा गार्ड का भी बयान रिकॉर्ड किया गया है. सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला जा रहा है ताकि कैसे घटना घटी है पता चल सके.

मेट्रो रेलवे की ओर से बताया गया है कि जिस ऐसी मेट्रो के जरिए शनिवार शाम 6:40 बजे के करीब ये घटना घटी है वो चेन्नई के इंटीग्रेटेड कोच फैक्ट्री में बना था. कायदे से मेट्रो के दरवाजे में कोई भी चीज अगर फंस जाती है तो अति सेंसेटिव सेंसर होने की वजह से दरवाजा तुरंत खुल जाता है और जब तक दरवाजा खुला रहता है तब तक मेट्रो नहीं चलती.

ऐसे में शनिवार को भीड़ के बीच ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहे वृद्ध का हाथ दरवाजे में फंसने के बाद दरवाजा क्यों नहीं खुला? इसके अलावा मेट्रो में वृद्ध का हाथ फंस जाने के बाद वह बाहर झूल रहे थे फिर भी ट्रेन कैसे तेज गति से चलने लगी? सुरक्षा में तैनात रहने वाले आरपीएफ कर्मी कहां थे? गार्ड की नजर क्यों नहीं पड़ी? कायदे से मेट्रो के आगे और पीछे तैनात रहने वाले आरपीएफ कर्मी सभी दरवाजों को बंद देखने के बाद विसिल के जरिए संकेत देते हैं.

जिसके बाद ट्रेन खुलती है. तो क्या आरपीएफ कर्मी की नजर उस पर नहीं पड़ी थी? वैसे प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब सजल कांजीलाल का हाथ दरवाजे में फंस गया था तब ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी ने दौड़कर उन्हें बचाने की कोशिश की थी लेकिन वो सफल नहीं हो पाए थे.


इस बीच ट्रेन की गति बढ़ गई थी और उक्त वृद्ध प्लेटफार्म पर गिरकर टकराते हुए कभी मेट्रो से तो कभी सुरंग की दीवारों से टक्कर खाते हुए दम तोड़ चुके थे. अचानक जब मोटर मैंने (चालक) ने इमरजेंसी ब्रेक लगाया तो वो छिटककर मेट्रो की पटरी पर जा गिरे थे.

सूचना मिलने के तुरंत बाद डीसी साउथ मिराज खालिद के नेतृत्व में पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई थी. अग्निशमन विभाग, कोलकाता पुलिस की आपदा प्रबंधन टीम और आरपीएफ की मदद से मेट्रो को सुरंग के अंदर से वापस प्लेटफार्म पर लाया गया. करीब 20 मिनट बाद उसमें से यात्रियों को एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाला गया.


कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम भी मौके पर पहुंच गए थे. उन्होंने कहा था कि मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मेट्रो रेलवे में इस तरह की भयावह दुर्घटना घटेगी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस मामले का संज्ञान लिया है. पुलिस ने भी मामला दर्ज किया है. जो भी दोषी हैं उन्हें बख्शा नहीं जाएगा.

मुख्यमंत्री ने केंद्र पर उठाये सवाल

मेट्रो रेलवे में हुई दुर्घटना को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर सवाल खड़ा किया है. उन्होंने कहा है कि जब मैं रेल मंत्री थी तब कोलकाता मेट्रो के लिए अलग जोन बनाया था लेकिन वर्तमान की नरेंद्र मोदी सरकार ने कोलकाता मेट्रो को पूरी तरह से उपेक्षित किया है.
यात्री सुरक्षा और सुविधाओं के लिए ना तो कदम उठाए जा रहे हैं और ना ही सतर्कता बरती जा रही है. अवहेलना की वजह से आए दिन मेट्रो में कोई न कोई दुर्घटना घटती जा रही है.


मुख्यमंत्री ने मृतक के परिजन को नौकरी देने का भी आश्वासन दिया है. वैसे मृतक सजल कांजीलाल शादीशुदा नहीं थे और अपने ममेरे भाई के पास कसबा इलाके में रहते थे और कोलकाता के मशहूर प्रेक्षागृह में पत्र-पत्रिका बेचने का काम करते थे.

इधर घटना के बाद मेट्रो रेल प्रबंधन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हुए हैं. सीसीटीवी फुटेज में लगातार निगरानी के बावजूद कैसे वृद्ध के फंसने की जानकारी मोटरमैन को नहीं दी जा सकी, इसकी भी जांच की जा रही है.

हिन्दुस्थान समाचार/ओम प्रकाश

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