#WORLDAGAINSTCHILDLABOUR : बाल श्रमिक दिवस आज, करोड़ों बच्चे हैं इसका शिकार
  • आज भी कई ऐसे बच्चे हैं जो बचपन में बाल मजदूरी की समस्या से जूझने को मजबूर हैं
  • भारत में तमाम कानूनों के बाद भी बाल मजदूरी करने वाले बच्चों की संख्या 1.1 करोड़ से ज्यादा की संख्या है

बचपन, इंसान की जिंदगी का सबसे हसीन पल. इस समय न किसी बात की टेंशन होती है और न ही किसी तरह की जिम्मेदारी. सिर्फ हर समय अपनी मस्ती में रहना, खाना-पीना, खेलना कूदना, पढ़ना और सोना.

वैसे हर किसी बच्चे का बचपन इतना ही खुशनुमा और हसीन हो ये जरूरी नहीं है. आज भी कई ऐसे बच्चे हैं जो बचपन में बाल मजदूरी की समस्या से जूझने को मजबूर हैं.

कोई भी बच्चा जिसकी उम्र 14 साल से कम की हो और वो घर-परिवार की जिम्मेदारी को उठाने के लिए काम करे तो उस बच्चे को बाल मजदूर कहा जाता है. आमतौर पर गरीबी, लाचारी या माता-पिता की प्रताड़ना के चलते ये बच्चे बाल मजदूरी के जाल में फंसते चले जाते हैं.

क्या है बाल श्रम

बाल श्रम एक ऐसा काम है जो बच्चों से उनकी क्षमता, गरिमा और बचपना छीन लेता है. बच्चों से काम करवाना उनके लिए शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए काफी नुकसानदेह हो सकता है.

करोड़ों बच्चे बाल मजदूर

भारत में तमाम कानूनों के बाद भी बाल मजदूरी करने वाले बच्चों की संख्या 1.1 करोड़ से ज्यादा की संख्या है. ये आंकडें 2011 की जनगणना के मुताबिक हैं.

इन बच्चों के सपने बचपन में ही काफूर हो जाते हैं. इनकी जिंदगी दुकानों के वर्तनों को धोने व अन्य मजदूरी के कामों में चली जाती है. 12 जून को सरकार और स्वयं सेवी संस्थाएं विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाती हैं.

सबसे ज्यादा बाल मजदूर यहां

देश भर में वैसे तो कई बाल मजदूर हैं, मगर फिर भी उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक बाल मजदूर हैं. उत्तर प्रदेश में 21.5% बाल मजदूर हैं. इसके अलावा बिहार में 10.7%, राजस्थान में 8.4%, महाराष्ट्र में 7.2%, मध्यप्रदेश में 6.9% बाल मजदूर हैं.

यहां लागू होता है बाल श्रम कानून

भारतीय संविधान की बात करें तो इसके अनुच्छेद-24 में बाल श्रम को प्रतिबंधित किया गया है. इसके बावजूद भी कई जगहों पर 14 साल से कम उम्र के बच्चों से कारखानों, दुकानों, होटलों जैसी जगहों पर काम करवाया जाता है.

बाल श्रम रोकने के लिए 1986 में बने कानून के तहत 14 साल से कम उम्र के बच्चों से काम कराने पर रोक लगती है. मगर ये कानून कृषि क्षेत्र पर लागू नहीं होता.

वहीं अगर 14 साल से कम उम्र के बच्चों से काम कराया जाता है तो ये दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है. इसके लिए अधिकतम दो साल की सजा या 50 हजार रूपये का जुर्माना यो दोनो लगाया जा सकता है.

ये है भारत और दुनिया का हाल

अगर दुनिया भर की बात करें तो यहां 16.8 करोड़ बच्चे ऐसे हैं जो खतरनाक कामों में अपनी जिंदगी जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं.

2002 में 12 जून को आईएलओ (ILO) ने विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाने का निर्णय किया था. इसके बाद से ही इस दिन को मनाया जा रहा है. जबकि 2025 तक हर तरह के बाल श्रम उन्मूलन का लक्ष्य रखा गया है.

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