घिसे टायर, टूटी हेडलाइट..फिर भी शान से दौड़ रहीं गाड़ियां

कोरबा

चिकने टायर, टूटी हेडलाइट, बिना बंफर के ऊर्जाधानी में मालवाहक से लेकर यात्री वाहन दौड़ रहे हैं. कई यात्री गाड़ियों के फ्लोर भी सड़ चुके हैं. गाड़ी के अंदर से पूरी जमीन दिखाई देती है। कई वाहन इतने कंडम हो गए हैं कि हिलते रहते हैं.

उनमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग सफर करते हैं, लेकिन उनकी जान की अनदेखी कर कंडम गाड़ियों को ट्रांसपोर्टर खींच रहे हैं. यहां तक कि स्कूल-कॉलेज की बसों के चक्के भी घिस चुके हैं। इससे बरसात में गाड़ी के स्लिप होने का खतरा ज्यादा रहता है. कंडम गाड़ियों की वजह से आए दिन हादसे हो रहे हैं.

चालक गाड़ी पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं. फिटनेस प्रमाण पत्र देने के बाद परिवहन विभाग भी जांच नहीं करता है। शहर में दौड़ने वाले अधिकतर मालवाहक वाहन, बसों ऑटो, शहर के आउटर में चलने वाले कई ट्रकों, ट्रेलर के पीछे के टायर घिसे हुए हैं। कुछ बसों में आगे के टायर भी घिसे हुए हैं.

इससे स्लिप होने का खतरा ज्यादा है. विशेषज्ञों की मानें तो गाड़ी के टायर घिसे नहीं होने चाहिए. घिसे होने से टायर स्लिप करते हैं. बरसात के दिन में गाड़ी ज्यादा स्लिप होती है. गाड़ी में ब्रेक भी नहीं लगता है. इससे हादसा होने की संभावना बढ़ जाती है.

गाड़ी अपने स्थान पर रुक नहीं पाती है. इसके बाद कोई भी इन गाड़ियों पर कार्रवाई करने वाला नहीं है. यहां तक ट्रक वाले बीच के पहियों को उठाकर चल रहे हैं. इससे गाड़ी और ज्यादा दबाव बन रहा है.

आग बुझाने की नहीं सुविधासुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार स्कूल-कॉलेज के अलावा सवारी बसों में फायर फाइटिंग सिस्टम होना चाहिए, ताकि कभी आगजनी जैसी घटना होने पर तुरंत आग पर काबू पाया जा सके, लेकिन अधिकतर बसों में फायर फाइटिंग सिस्टम ही नहीं था. जिन गाड़ियों में फायर सिस्टम था, वह भी बहुत पुराना था.

आदेश का कहीं भी पालन नहीं हो रहा है. जब भी किसी बस में आगजनी की घटना हुई है तो कभी उस पर तुरंत काबू नहीं पाया गया है, क्योंकि बस में आग बुझाने के साधन भी नहीं होते. गेट में नहीं कांचसुप्रीट कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार स्कूल-कॉलेज के बस के गेट में अच्छे और मजबूत लॉक होने चाहिए, लेकिन कई स्कूल बसों के गेट में जंग लगे लॉक लगे है .

यहां तक कि गेट के कांच भी टूटे हुए है जहां से कोई भी गिर सकता है. यात्री बसों के यही हाल हैं. यहां तक कि ट्रकों के कांच तड़के हुए हैं. सामने देखने में दिक्कत होती है। यहां तक खिड़की में भी कांच नहीं लगा है.

बिना लाइट की गाड़ीऑटो, मिनी डोर में हैडलाइट सिर्फ शोपीस साबित हो रहे हैं. शहर के अंदर दौड़ने वाली अधिकांश मिनीडोर, ऑटो, मैजिक के हेडलाइट टूटी हुई है. रात में ऑटो ऐसी ही दौड़ रहे हैं. यहां तक कि ब्रेक लाइट और एंडिकेटर भी टूटे हुए हैं। खासतौर पर मालवाहक गाड़ी, बस और ऑटो के यही हाल है.

ब्रेक लाइट टूटी हुई हैं. रात में दिखाई भी नहीं देता है. गाड़ी वाला जब हाथ मारता है, तब समझ आता है कि गाड़ी मुड़ रही है. मालवाहक में सवारीमालवाहक गाड़ी में सवारी ढोई जा रही है. ट्रैक्टर और मिनी डोर में खासतौर पर लोगों को बैठाया जाता है.

ट्रांसपोर्टर अपनी गाड़ियों मेनटेन करके रखते हैं. हर माह मरम्मत कराया जाता है. बिना फिटनेस के गाड़ियां नहीं चलाते हैं. वर्सन हर साल गाड़ियों की फिटनेस की जांच जाती है. जब गाड़ी फिट पाई जाती है तो उसे फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाता है. जो अनफिट रहती है, उसका परमिट रद्द कर दिया जाता है. समय-समय पर फिटनेस की जांच भी की जाती है.

हिन्दुस्थान समाचार / हरीश

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