हुनर के धागे से छत्तीसगढ़ के युवा बुन रहे जिंदगी का ताना बाना

फैशन और आधुनिकता की दौड़ में जहां आज बुनकरी की कला खतरे में है वहीं छत्तीसगढ़ के युवा अपने हुनर को तराश कर इसे सहेजने में लगे हैं. ये युवा बुनकरी का कौशल सीख कर अपने उज्ज्वल भविष्य के सपनों का ताना बाना बुन रहे हैं. 

प्रदेश के युवाओं के बनाए कपड़ों की प्रदर्शनी नई दिल्ली के आरके खन्ना टेनिस स्टेडियम में लगाई गयी है, जहां लोग इनकी बुनकरी को काफी पसंद कर रहे हैं. प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव, बिलासपुर, जांजगीर चांपा और बालोद जिले के चार युवा अपने उत्पादों के साथ शामिल हुए हैं.

संस्था ‘वूमेन वीव’ के माध्यम के छत्तीसगढ़ के युवा हथकरघा उद्योग के विभिन्न पहलुओं के संबंध में आधुनिकतम प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं और अपने कौशल से आर्थिक रूप से सक्षम होने के साथ ही बुनकरी की कला को सहेज रहे हैं. बिलासपुर से आये उमाकांत साहू ने बताया कि उनके घर में सभी लोग खेती-किसानी के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं. 

उन्होने अपनी रुचि के आधार पर बुनकरी का प्रशिक्षण प्राप्त किया है और अब रोजगार के रूप में अपनाया है. बालोद जिले से आए पवित्र कुमार की मां सोसायटी के माध्यम से बुनकरी से जुड़ी हुई हैं. वे प्रशिक्षण प्राप्त कर नई-नई डिज़ाइन बनाने में अपनी मां की मदद कर करते हैं. 

जांजगीर चांपा से आए आशीष देवांगन के पिता कृषक हैं. वे अपने घर के पहले व्यक्ति हैं, जिन्होंने बुनकरी को व्यवसाय के तौर पर शुरू किया है. राजनांदगांव के सूरज पटेल की भी रुचि दस्तकारी में रही है और वे अब ताने बाने पर अपना हुनर दिखा रहे हैं.

प्रदर्शनी में युवा कई तरह के कपड़े लेकर आए हैं, जिसमें कोसे की साड़ी, शर्ट के कपड़े, होम डेकोरेशन के आइटम हैं. युवाओं ने बताया कि बारीक बुनकरी से तैयार साड़ियों को बनाने में 6 से 7 दिन लगते हैं. शर्ट के कपड़े 3 से 4 दिन में तैयार हो जाते हैं.

हिन्दुस्थान समाचार/सुशील

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