यूं ही नहीं है फारुक अब्दुल्ला की चुप्पी

जम्मू-कश्मीर में सामान्य होते हालात के बीच राजनीतिक दलों के नेताओं की रिहाई बहुत कुछ कहती है.नेशनल कांफ्रेंस ने तो 370 और 35-ए पर चुप्पी ही साध ली है.वह अब पूर्ण राज्य की बहाली के लिए लड़ेगी और केंद्रीय गृह मंत्री ने भी साफ कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर के केंद्रशासित प्रदेश वाली स्थिति स्थायी नहीं है.

तमाम विषम परिस्थितियों के बीच कोई छोटी सी बात ऐसी होती है, जिसे अच्छे संकेत के रूप में लिया जाना चाहिए.जम्मू में कतिपय डॉक्टर, वकील और अन्य बुद्धिजीवियों ने सितंबर समाप्त होने के पहले एक नया राष्ट्रवादी दल बनाया.नये दल ‘जम्मू-कश्मीर पॉलिटिकल मूवमेंट’ का मानना है कि उनका और पूरे राज्य का भविष्य भारत के साथ ही जुड़ा हुआ है.दल का दावा है कि उसके पास 25 हजार कार्यकर्ता हैं और नयी पार्टी राज्य के चुनावों में हिस्सा लेगी.तब स्पष्ट नहीं हो पाया कि जम्मू-कश्मीर पॉलिटिकल मूवमेंट ब्लॉक विकास परिषद (बीडीसी) के चुनाव में क्या भूमिका निभायेगा.

उसके उलट राज्य के एक प्रमुख दल एनसीपी ने इन चुनावों से अलग रहने का फैसला किया.सवाल है कि नये दल के गठन सम्बंधी छोटी बात अच्छे संकेत कैसे दे गयी? महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी ने तो इन चुनावों से अलग रहने का फैसला कर लिया है.फारुक अब्दुल्ला की एनसीपी भी अब वही कर रही है.फिर तो दोनों ही दल कुछ अच्छा करते नहीं दिख रहे.

इसका जवाब दो सप्ताह के अंदर ही एक प्रमुख घटनाक्रम दे गया.राज्य प्रशासन ने नजरबंद और जेलों में बंद राजनीतिक नेताओं से उनके कार्यकर्ताओं को मिलने की छूट दे दी.जिस एनसीपी ने इस छूट के तहत नेताओं की बैठक के बाद चुनाव से अलग रहने का फैसला किया, सूत्र बताते हैं कि आगे के लिए वह भी अपने रवैये में नरमी लाने जा रही है.

एनसीपी की नरमी के संकेत खुद पार्टी अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला के हाव-भाव से मिले.पार्टी सांसद हसनैन मसूदी के नेतृत्व में नेशनल कांफ्रेंस के 15 सदस्यीय दल ने गुपकार रोड पर जब पूर्व मुख्यमंत्री से मुलाकात की, वे न केवल पार्टी नेताओं के साथ खुश नजर आये, वरन अपनी पत्नी मोली के साथ भी उन्होंने फोटो खिंचवाई.यह दो महीने पहले की उनकी तस्वीर से बिल्कुल अलग नजारा था,जिसमें फारुक थके हुए नजर आ रहे थे. तब टीवी चैनल से बात करते हुए उनकी आंखों में आंसू तक आ गये थे.

इस बार जो अधिक गौर करने वाली बात थी, वह यह कि सांसद मसूदी और मोहम्मद अकबर लोन के साथ जम्मू-कश्मीर में सामान्य होते हालात के बीच राजनीतिक दलों के नेताओं की रिहाई बहुत कुछ कहती है.नेशनल कांफ्रेंस ने तो 370 और 35-ए पर चुप्पी ही साध ली है.वह अब पूर्ण राज्य की बहाली के लिए लड़ेगी और केंद्रीय गृह मंत्री ने भी साफ कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर के केंद्रशासित प्रदेश वाली स्थिति स्थायी नहीं है.13 16-31 अक्टूबर 2019 वाली तस्वीर में वे जीत के ‘वी’ निशान बनाते हुए दिखे.

पूरा लेख पढ़ें यथावत के 16 -31 अक्टूबर अंक में…

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