सबसे प्राचीन पद्धति है हीलिंग चिकित्साः कैलाशानंद

हरिद्वार

श्री दक्षिण काली पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने सोमवार को कहा कि भारतीय ऋषि मुनियों द्वारा प्रतिपादित हीलिंग चिकित्सा पद्धति विश्व की सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धति है.

इस पद्धति का ज्ञान प्राप्त कर व्यक्ति ब्रहामण्डीय शक्तियों से प्राप्त सकारात्मक ऊर्जा का उपयोग कर बिना दवाओं के भी हमेशा स्वस्थ्य रह सकता है.

बिना दवाओं के भी उपचार हो सकता है. हीलिंग पद्धति इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है. जगजीतपुर स्थित कॉस्मिक रिवाइवल केंद्र में सोमवार को आयोजित समारोह के दौरान स्थानीय नागरिकों एवं केंद्र में इलाज करा रहे रोगियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि डॉ अजय मगन द्वारा स्थापित कॉस्मिक रिवाइवल केंद्र में ब्रहामण्डीय ऊर्जा पर आधारित उपचार की जो विधि विकसित की गयी है.

रोगों से पीड़ित मानवता को इसका अवश्य ही लाभ मिलेगा. इस पद्धति के लिए प्राचीन हीलिंग तकनीकों एवं नवीनतम वैश्विक वैज्ञानिक अनुसंधानों के संयुक्त मिश्रण पर आधारित हीलिंग विधा है. जयराम पीठाधीश्वर ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि कॉस्मोलॉजी व कॉस्मोपैथी स्वास्थ्य रक्षण व धन संचय का उत्तम उपाय है.

प्राचीन काल में हमारे पूर्वज इसी पद्धति के आधार पर प्रकृति से समन्वय कर चिरायु जीवन व्यतीत करते थे. स्वामी प्रबोधानंद गिरि व बाबा हठयोगी महाराज ने कहा कि प्रकृति से उत्पन्न मानव शरीर प्राकृतिक तत्वों से ही बना है. शरीर के अस्वस्थ होने पर प्रकृति से प्राप्त कर सकारात्मक ऊर्जा का उपयोग कर इसे स्वस्थ बनाया जा सकता है.

हिन्दुस्थान समाचार/रजनीकांत

%d bloggers like this: