मोदी कैबिनेट में दिखती पूरे देश की छवि

  • चीन मामलों के गहरे जानकार तमिल मूल के भारतीय विदेश सेवा अधिकारी एस.एस. जयशंकर की कुशाग्र बुद्धि से मोदी जी तब ही विशेष रूप से प्रभावित हो गए थे
  • चीन ने अनावश्यक रूप से भारत-भूटान और चीन की सीमा पर डोकलम में विवाद खड़ा कर दिया था

लोकसभा चुनाव में अभूतपूर्व सफलता मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी कैबिनेट में कई नए और प्रतिभावान चेहरों को रखा है और अपने कुछ पुराने साथियों को आराम भी दे दिया है. उन्होंने पूर्व विदेश सचिव एस. जयशंकर को अपनी कैबिनेट में महत्वपूर्ण स्थान दिया. वे अब साउथ ब्लाक से विदेश मंत्रालय को देखेंगें.

चीन मामलों के गहरे जानकार तमिल मूल के भारतीय विदेश सेवा अधिकारी एस.एस. जयशंकर की कुशाग्र बुद्धि से मोदी जी तब ही विशेष रूप से प्रभावित हो गए थे, जब चीन ने अनावश्यक रूप से भारत-भूटान और चीन की सीमा पर डोकलम में विवाद खड़ा कर दिया था. उस वक्त जयशंकर की कूटनीतिक मामलों की और चीन की विदेश-निति की गहरी समझ के कारण ही भारत चीन पर लगातार हावी रहा था. वे सुषमा स्वराज का स्थान लेने जा रहे हैं. पर तय मानिए कि प्रधानमंत्री मोदी आगे भी औपचारिक और अनौपचारिक रूप से सुषमा स्वराज की सलाह और सेवाएं तो लेते ही रहेंगे.

भाजपा के जुझारू और सकल अध्यक्ष अमित शाह का कैबिनेट में आने का यह मतलब न लगाया जाए कि वे भी अब संगठन के काम को नहीं देखेगे. वे निश्चित रूप से आगे भी बतौर गृह मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री के दायित्वों का निर्वाह करने के साथ-साथ भाजपा संगठन को अपने लंबे अनुभवों से समृद्ध करते ही रहेंगे.

भाजपा ने उनकी रणनीति के फलस्वरूप ही पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और पूर्वोत्तर जैसे राज्यों में इस लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जोरदार दस्तक दी. लेकिन, दूसरी ओर मोदी कैबिनेट में सुरेश प्रभु, जयंत सिन्हा,जे.पी. नड्डा, डॉ. महेश शर्मा, मानेका गांधी जैसे दिग्गजों का न होना लोगों को पहली नजर में ही हैरान करने वाला लग सकता है. पर मंत्रिमंडल में किसे रखा जाय और किसे नहीं, यह तो एकमात्र प्रधानमंत्री का ही विवेकाधिकार और विशेषाधिकार होता है कि वह अपनी टीम में किसे रखे और किसे न रखे. पर अब यह संभावना व्यक्त की जा रही है कि जगत प्रकाश नड्डा जी अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकते हैं. वे मूल रूप से संगठन के ही आदमी हैं.

हिमाचल प्रदेश के रहने वाले नड्डा को नरेन्द्र मोदी और अमित शाह का विशवासपात्र माना जाता वे संघ परिवार से ही आते हैं. जहां तक सुरेश प्रभू के कैबिनेट से बाहर जाने का प्रश्न है, तो ऐसा मुमकिन हो सकता है कि उन्हें शिव सेना के दबाव के चलते ही मंत्रिमंडल से बाहर रखा गया हो. हालांकि, इस संबंध में पुख्ता जानकारी तो उद्धव ठाकरे या प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के अतिरिक्त किसी के पास भी नहीं होगी. पर प्रभु जी एक मेहनती और कर्मठ इंसान हैं.

इसी प्रकार लगता तो यही है कि योग्य और कर्मठ जयंत सिन्हा को अपने पिता यशंवत सिन्हा के बडबोलेपन की ही सजा भुगतनी पड़ी. य़शवंत सिन्हा लगातार मोदी सरकार के कामकाज पर अनावश्यक मीनमेख निकालते रहे हैं. पर उनकी आलोचनाओं पर प्रधानमंत्री मोदी ने कभी पलट कर वार करने की तो दूर उसका नोटिस तक नहीं लिया है.

जहां तक जयंत सिन्हा का प्रश्न है तो उन्हें हालिया लोकसभा चुनाव में हजारीबाग से शानदार सफलता मिली. वे 4 लाख 78 हजार मतों से विजयी हुए. जयंत सिन्हा ने पारी की शुरुआत वित्त राज्यमंत्री के रूप में की थी और बाद में नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री बनाए गए जिस जिम्मेदारी को भी उन्होंने बखूबी निभाया.

जहां तक सुल्तानपुर से जीती मानेका गांधी के कैबिनेट में जगह ना पाने का सवाल है तो संकेतों से लगता है कि वे लोकसभा की अगली अध्यक्ष बन सकती हैं. जाहिर है, अभी इस संबंध में ठोस जानकारी तो किसी के पास नहीं है.

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को आख़िरकार मोदी सरकार में बतौर कैबिनेट मंत्री जगह मिल ही गई. उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद यह पहला अवसर है जब राज्य के किसी सांसद को सीधे कैबिनेट मंत्री बनाया गया है.

संयुक्त उत्तर प्रदेश के भी मंत्री रहे निशंक को पारितोषिक देकर मोदी जी ने उत्तराखंड में क्षेत्रीय, जातीय, सामाजिक और गुटीय संतुलन को भी साधा है. बेशक निशंक ने विगत लोकसभा में उत्तराखंड के सबसे ज्यादा सक्रिय सांसद के रूप में जगह बनाया है. इसके अतिरिक्त वे हिंदी प्रदेशों के एक बड़े ब्राह्मण नेता के रूप में ही पिछले दिनों तेजी से उभरे हैं.

झारखंड से मोदी सरकार में राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके दमदार आदिवासी नेता अर्जुन मुंडा ने भी शपथ ग्रहण की. केंद्र में पिछली मोदी सरकार में दो राज्यमंत्री सुदर्शन भगत और जयंत सिन्हा थे, मगर इस बार इन दोनों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली. अर्जुन मुंडा वर्तमान मुख्यमंत्री रघुवर दस के संतुलन के रूप में भी देखे जा रहे हैं.

मोदी-1 सरकार में सुदर्शन भगत जनजातीय मामलों के मंत्रालय के राज्यमंत्री थे. 2014 में उन्हें केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री भी बनाया गया था. बाद में मंत्रालय बदल कर सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय और इसके बाद कृषि और किसान मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी. वे भी एक विनम्र एवं मिलनसार मंत्री के रूप में लोकप्रिय थे.

खूंटी से सांसद बने अर्जुन मुंडा फ़िलहाल केन्द्र में झारखंड के एकमात्र मंत्री होंगे. देखा जाए तो नई कैबिनेट में आप लगभग सारे भारत को देख सकते हैं. जिन 58 मंत्रियों को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलवाई, उनका संबंध देश के 29 में से 20 राज्यों से है. हालांकि कहने को तो तमिलनाडू से कोई भी मंत्री नहीं बना है, पर एस. एस.जयशंकर और निर्मला सीतारमण दोनों मूल रूप से तमिलनाडू से ही हैं.

इसी तरह से केरल की परोक्ष रूप से नुमाइंदगी वी. मुरलीधरन कर रहे हैं. वे मूल रूप से केरल से हैं, पर फिलहाल वे महाराष्ट्र से राज्य सभा सदस्य हैं. इस प्रकार मोदी-२ मंत्रिमंडल में 22 राज्यों को प्रतिनिधित्व है.

नरेन्द्र मोदी कैबिनेट में राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी,स्मृति ईरानी, निर्मला सीतारमण,जनरल (रिटायर) वी.के. सिंह और संतोष गंगवार के फिर से जगह बना पाने पर किसी को भी शक नहीं हुआ होगा. राजनाथ सिंह ने जहां अपने गृह मंत्रालय को कुशलता से संभाला था, वहीं नागपुर के लोकप्रिय नेता गडकरी की देखरेख में देश ने इंफ्रास्ट्राक्चर एवं ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाई थी. अब राजनाथ सिंह जी को रक्षा मंत्रालय का महत्वपूर्ण प्रभार दिया गया है.

मुंबई-पुणे हाई-वे का निर्माण तय समय में पूरा कर अपनी क्षमताओं को साबित करने वाले नितिन गडकरी ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री के तौर पर कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं समय पर पूरी कीं. गडकरी ने हजारों किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों की तेजी से मरम्मत और चौड़ीकरण का काम भी किया. नितिन गडकरी की चाहत है कि वे बनारस में सी-प्लेन और नदियों में क्रूज चलवाए.

गडकरी जी ऐसे व्यक्तित्व हैं कि कुछ भी ठान लें तो करके ही छोड़ते हैं. वे दिन-रात काम करने वाले मंत्री हैं. अब उन्हें एमएसएमई मंत्रालय भी मिला है जो रोजगार की अपार संभावनाएं भी रखता है जिसपर मोदी जी का विशेष ध्यान है.

निर्मला सीतारमण की तो फिर से मोदी सरकार की कैबिनेट में वापसी तय थी. अपने पहले कार्यकाल में ही जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी में पढ़ी निर्मला जी काफी सक्रिय रहीं और राफेल विवाद पर उन्होंने संसद और बाहर सरकार का बेहतरीन तरीके से बचाव किया. अब उन्हें अतिमहत्वपूर्ण वित्त मंत्रालय की जिम्मेवारी मिली है.

स्मृति ईरानी ने अमेठी से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को परास्त करके कांग्रेस के स्थापित किले को धवस्त कर दिया. स्मृति ईरानी की मेहनत और लगन का भी कोई सानी नहीं है. इसीलिए उन्हें मोदी जी ने टेक्सटाइल मंत्रालय के अतितिक्त महिला और बल कल्याण मंत्रालय का प्रभार भी दिया है.

नई कैबिनेट में उत्तर प्रदेश से आठ मंत्री हैं. इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं. तीन को कैबिनेट, दो को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और तीन को राज्यमंत्री का दर्जा दिया है. प्रधानमंत्री मोदी खुद भी बनारस से सांसद हैं. उन्होंने कैबिनेट में उत्तर प्रदेश की उम्दा भागेदारी सुनिश्चित करके संकेत और संदेश दे दिया गया है कि वे इस विशाल प्रदेश की हैसियत को समझते हैं.

अब मोदी-2 कैबिनेट का गठन तो हो ही गया है, इसलिए देश अब यह देखेगा कि यह सरकार किस तरह से जनता के साथ किए वादों को निभाती है. चूंकि यह नरेन्द्र मोदी की कैबिनेट है तो सारे देश को यकीन भी है कि यह काम करने वाली सरकार होगी.

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