राज्य मानवाधिकार आयोग में अध्यक्ष की तैनाती की कवायद तेज

शिमला, 19 नवंबर
पिछले 2005 से कार्य नहीं कर रहे इस आयोग को क्रियाशील बनाने के लिए जयराम सरकार ने कवायद भी शुरू कर दी है. प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही राज्य सरकार ने चेयरमैन सहित दो सदस्यों की नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे हैं, जिसकी अंतिम तिथि 31 दिसंबर तय है.

हिमाचल प्रदेश में मानवाधिकार आयोग 14 वर्षों से काम नहीं कर रहा है. कारण है कि सरकार ने आयोग में किसी भी पद पर नियुक्तियां नहीं की हैं. हालत ये है कि फरवरी 2017 से राज्य में लोकायुक्त भी नहीं है. उच्च न्यायालय की फटकार के बाद सरकार ने हरकम में आते हुए मानवाधिकार आयोग में नियुक्तियों को लेकर हरकत शुरू कर दी है. सरकार ने राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद के लिए आवेदन मांगे हैं.

इसी तरह से आयोग के दो सदस्यों के पदों के लिए भी आवेदन करने की प्रक्रिया को अधिसूचित किया है. प्रदेश सरकार की ओर से जारी इस प्रक्रिया के तहत कहा गया है कि 31 दिसंबर तक इच्छुक आवेदनकर्ता आवेदन कर सकते हैं. उसके बाद चयन कमेटी प्राप्त आवेदनों के आधार पर अध्यक्ष व सदस्यों का चयन करेगी. ऐसे में राज्य के भीतर तीन महीनों के भीतर मानवाधिकार आयोग कार्य शुरू कर देगा.

अध्यक्ष पद के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति का किसी राज्य का मुख्य न्यायाधीश होना जरूरी है या फिर व्यक्ति सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश रह चुका हो. आयोग के एक सदस्य पद के लिए जिला सत्र न्यायाधीश रहा होना अनिवार्य है. दूसरे सदस्य पद के लिए आवेदनकर्ता को मानवाधिकार मामलों का अनुभव होना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि बीते सात नवंबर को प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में मानवाधिकार आयोग और लोकयुक्ता का गठन न करने पर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी थी. कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि क्या राज्य सरकार को मानवाधिकार की कदर है या नहीं. न्यायालय के समक्ष दायर जनहित याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि राज्य मानवाधिकार आयोग वर्ष 2005 से कार्य नहीं कर रहा. पिछले 14 सालों में तीन बार सरकारी बदल चुकी है मगर लोगों के अधिकारों का हनन होने की स्थिति में उनको तुरंत न्याय दिलवाने के लिए कोई उपयुक्त फोरम नहीं है.

हिन्दुस्थान समाचार/उज्जवल

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