सबरीमाला मंदिर के कपाट खुले, फिर नहीं जा सकीं महिलाएं

तिरुवनंतपुरम, 16 नवम्बर
भगवान अयप्पा के सबरीमाला मंदिर के कपाट दो महीने तक चलने वाले दर्शन पूजन के लिए आज शाम पांच बजे खोल दिए गए. सबरीमाला मंदिर के पुजारी महेश कंडाराऊ ने गर्भ गृह के कपाट खोले, जिसके बाद देश के विभिन्न भागों से पहुंचे श्रद्धालुओं के दर्शन पूजन का सिलसिला शुरू हो गया.

मंदिर में प्रतिबंधित आयु वर्ग (10 से 50 वर्ष) की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति संबंधी मामले में पुनरीक्षण याचिका पर फैसले के बाद पहली बार मंदिर के कपाट खुले हैं. न्यायालय ने सभी आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति देने संबंधी अपने पिछले वर्ष के फैसले को बरकरार रखा है लेकिन पूरे मामले को समग्र विचार के लिए सात सदस्यीय संविधान पीठ को सौंप दिया है.

प्रतिबंधित आयु वर्ग की दस महिलाएं आज सबरीमाला मंदिर में दर्शन पूजन के लिए पंपा आधार शिविर पहुंची थीं, जहां उन्हें पुलिसकर्मियों ने आगे जाने की अनुमति नहीं दी. राज्य सरकार ने पिछले वर्ष अपनाए गए रवैये से अलग हटते हुए इस वर्ष महिलाओं को पुलिस संरक्षण नहीं देने का फैसला किया है.

राज्य सरकार ने धार्मिक मामलों संबंधी देवाश्वाम मंत्री के. सुरेन्द्रन ने कहा कि सबरीमाला महिलावादी आंदोलन का अखाड़ा नहीं है. राज्य सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर कुछ भ्रम है जब तक स्थिति पूरी तरह साफ नहीं होती, प्रशासन की ओर से सुरक्षा प्रदान नहीं की जाएगी.

सबरीमाला बचाओ आंदोलन के नेताओं और विभिन्न विपक्षी दलों ने राज्य की वाम मोर्चा सरकार से आग्रह किया है कि वह प्रतिबंधित आयु वर्ग की महिलाओं को प्रायोजित रूप से मंदिर में भेजने का प्रयास न करे.

इस बीच, महाराष्ट्र में महिलावादी आंदोलन की नेता तृप्ति देसाई ने कहा है कि वह दर्शन पूजन के लिए सबरीमाला जाएंगी. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार महिलाओं को सुरक्षा प्रदान न करके न्यायालय के आदेश की अवहेलना कर रही है.

हिन्दुस्थान समाचार/अजीत

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