आतंकी हाफिज सईद को 10 साल की सजा, जानें कब और कैसे शुरू किया आतंक का कारोबार

नई दिल्ली. आतंक को पालने पोसने के लिए दुनिया भर में बदनाम आतंकी हाफिज मोहम्मद सईद को आखिर पाकिस्तान ने भी आतंक का सरगना मान ही लिया..

बुधवार को पाकिस्तान के एक एंटी टेरर कोर्ट ने टेरर फंडिंग के दो अलग-अलग मामलों में सईद को 11 साल की सजा सुनाई .. जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद दुनिया के खूंखार आतंकियों में से एक है. वो भारत और अमेरिका समेत कई देशों में मोस्ट वांटेड है.

हाफिज सईद पर आतंकी फंडिंग को लेकर दो मामले कोर्ट में चल रहे थे जिनमें से एक पर कोर्ट ने फैसला सुनाया है दूसरे मामले पर 18 फरवरी को सुनवाई होनी है….

हाफिज सईद पर दोनों मामलों में साढ़े पांच-साढ़े पांच साल की जेल की सजा और 15,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.. हाफिज सईद पर आरोप था कि वो चैरिटी की आड़ में पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा था और वो कई आतंकी समूहों को फंडिग भी करता था..

संयुक्त राष्ट्र संघ में हाफिज लंबे समय से ग्लोबल आतंकी की सूची में दर्ज है लेकिन पाकिस्तान में खुलेआम घूमता है… मीटिंग्स करता है लेकिन अब तक कभी पाकिस्तान में उसे ग्लोबल आतंकवादी होने के कारण गिरफ्तार नहीं किया गया…. जब भी उसे गिरफ्तार किया गया तो उसके खिलाफ वहां हल्के मामले बनाए गए और फिर रिहा कर दिया गया….

दरअसल पाकिस्तान लगातार उसे कुछ कुछ दिनों के लिए जेल के अंदर करके दुनिया की आंखों में धूल झोंकने का काम ज्यादा करता रहा है….

हाफिज पर ये फैसला तब आया है जब पाक पर FATF की कार्रवाई की तलवार लटक रही है.. पाकिस्तान को चेतावनी दी गई थी कि यदि फरवरी तक आतंकवाद के वित्तपोषण पर नियंत्रण नहीं किया जाता है तो उसे ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाएगा…हाफिज के खिलाफ आया कोर्ट का फैसला उसी से जोड़कर देखा जा रहा है…

  • क्या है पूरा नेटवर्क, कैसे इकट्ठा होता है फंड
  • हाफिज सईद आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा के संस्थापकों में से एक है. हाफिज पाकिस्तान में जमात उद दावा नामक संगठन चलाता है.
  • इसी संगठन के जरिए जमात-उद-दावा अपने लिए फंड इकट्ठा करता है. पूरे पाकिस्तान में इस संगठन और इसके सहयोगियों का तगड़ा नेटवर्क है.
  • ये संगठन अपनी आतंकी गतिविधियों पर पर्दा डालने और दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के लिए स्कूल, अस्पताल और एंबुलेंस सेवा का इस्तेमाल करता है.
  • जमात-उद-दावा का अपना प्रकाशन है, जिसके जरिए वो प्रोपागैंडा पत्र-पत्रिकाएं निकालता है. इसके अलावा जमात के अपने अस्पताल हैं. वो एम्बुलेंस सेवाएं भी देता है.
  • जमात-उद-दावा के पास कम से कम 50,000 वालंटियर आतंकी और बाकायदा सैलरी पाने वाले सैकड़ों आतंकी हैं
  • 2006 में मुंबई ट्रेन धमाकों में भी इस संगठन का हाथ रहा
  • 26 नवंबर 2008 को भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में लश्कर के 10 आतंकियों ने हमला था जिसमें 160 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और 300 लोग घायल हो गए थे
  • जमात-उद-दावा को संयुक्त राष्ट्र ने लश्कर-ए-तैयबा के साथ ही 2008 में बैन कर दिया था.
  • अमेरिका ने इसके सिर पर एक करोड़ डॉलर का इनाम घोषित कर रखा है
  • अमेरिका ने जून 2014 को जमात-उद-दावा को आतंकी संगठन भी घोषित किया था.
  • भारत सहित अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, रूस और ऑस्ट्रेलिया ने इसके दोनों संगठनों को प्रतिबंधित कर रखा है.

हाफिज अब कई बीमारियों से घिरा हुआ है.. .पिछले दिनों ये खबरें आई थीं कि उसका ज्यादातर समय अस्पताल में बीतता है….हाफिज ने पाकिस्तान में अपनी सियासी पार्टी भी बनाई और चुनाव भी लड़ा हालांकि उसे हार का सामना करना पड़ा था…

सईद को ही पाकिस्तान कई बार अंतर्राष्ट्रीय दबाव में गिरफ्तार कर चुका है. मगर कुछ दिनों तक सरकारी मेहमान बनाकर उसे फिर आजाद कर दिया जाता था मगर इस बार ऐसी उम्मीद कम है.

क्योंकि भारत की कूटनीति की वजह से पाकिस्तान दुनिया के सामने पूरी तरह अलग-थलग हो चुका है… इतना ही नहीं इमरान खान पर पाकिस्तान के अंदर भी आतंकी संगठनों पर कार्रवाई का दबाव है..

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