टेलिकॉम चार्ज बढ़ने के कयास, लेकिन क्या बाजार अनुमति देगा

नई दिल्ली. कॉर्पोरेट वर्ल्ड में यह कयास लगाए जा रहे हैं  कि टेेलिकॉम कंपनियां अपना बजूद और मजबूत करने और बाजार में बने रहने के लिए टेलिकॉम शुल्क में बढ़ोतरी कर सकती है. इससे इस क्षेत्र में प्राइस वार शुरु हो सकता है. लेकिन इससे जहां करोड़ों आम उपभोक्ता को परेशानी होगी वहीं कुछ कंपनियों को अपना वजूद बनाए रखने जैसे वोड़ाफोन आईडिया को सहुलियत होगी वहीं कुछ को अपनी आय जैसे रिलायंस और भारती टेलिकॉम को फायदा होगा.

पिछले साल दिसंबर में रिलायंस जिओ के लॉन्च के बाद प्राइस वार देखने को मिला था. लेकिन इस समय इस वार के बढ़ने की ज्यादा संभावना है क्योंकि एक तो लॉकडाउन के कारण अधिकांश लोग घरों में है बैठे हैं तो ज्यादा संपर्क फोन पर ही हो रहा है. साथ ही अनेक कंपनियों के कर्मचारी खासकर आईटी कंपनियों घर से ही काम कर रहे हैं. इससे टेलिकॉम कंपनियों का डेटा काफी खर्च हो रहा है। इस कारण से वे अपना शुल्क बढ़ा सकते हैं.

इससे एक तो इन कंपनियों को अपनी लागत निकालने में सुविधा होगी वहीं उन्हें अपनी पूंजी पर मुनाफा कमाने में मदद मिलेगी. दिसंबर, 2019में 25 प्रतिशत टैरिफ हाई हुआ था। इस बढ़ी आय से ये कंपनियां अपने ग्राहकों के लिए नए-नए फीचर एड कर सकेंगी.

इस शुल्क को बढ़ाने का भारतीय कंपनियों के पास बड़ा आधार है क्योंकि यहां करीब 80 करोड़ ग्राहक हैं जिनके पास स्मार्टफोन हैं. साथ ही एक बड़ी वर्किंग आबादी है जो युवाओं की है और वे सब अपना काम मोबाइल पर करते हैं. यहां तक की फोन बेकार हो चुके हैं.

यह सही कि अभी तक इन कंपनियों को ज्यादा फायदा नहीं हुआ है. वोड़ाफोन ने तो अपना पिछला लोन चुकाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से 20 साल का समय मांगा है जिस पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में सुनवाई होगी. रिलायंस की जिओ को जरुर विदेशों से अच्छा खासा इन्वेस्टमेंट मिला है और आज ही उसे अमेरिकी सेमीकांडक्टर कंपनी इन्टेल से 1894 करोड़ रुपये का निवेश मिला है. भारती को भी 5 प्रतिशत एफसीई यील्ड मिला है.

सरकार भी चाहती है कि देश में 2-3 टेलिकॉम प्लेयर रहें ताकि उपभोक्ताओं को प्रतिस्पर्धा का लाभ मिल सके. साथ ही आगामी दौर डेटा का खासकर तीव्र गति से उन्हें भेजने का है इसलिए इस क्षेत्र में उठापटक बनी रहेगी.

लेकिन जानकारों का कहना है कि यदि टैरिफ हाई 20-25 प्रतिशत भी हुआ तो इससे लोगों को400 अरब रुपया तक कम हो जाएगा. मौजूदा माहौल में जानकारों का कहना है कि टैरिफ हाई कंपनियों के लिए संभव नहीं होगी. खासकर 5-6 महीनों के लिए. रिलायंस जिओ को टैरिफ बढ़ाने की जरुरत नहीं है. लेकिन भारती और वोड़ाफोन को जरुरत है ताकि वे बाजार में बने रहें। लेकिन सरकार क्या जनहित नहीं देखेगी? 

HM/NKB 

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