विधानसभा में दिखे तेजस्वी, RJD विधायकों में दौड़ी खुशी की लहर

रजनी शंकर
पटना, 03 जुलाई. लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन से नदारद प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव 28 जून से चल रहे बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र में गुरुवार को सदन की कार्यवाही में शामिल हुए.

बिहार विधानसभा में गुरुवार को प्रश्नोत्तर काल समाप्त होने से 15 मिनट पूर्व तेजस्वी यादव अचानक सदन के अंदर अपने स्थान पर आकर बैठे. अपने नेता के सदन में आने से उत्साहित राष्ट्रीय जनता दल के सदस्यों ने मेज थपथपा कर उनका स्वागत किया.

सदन की कार्यवाही समाप्त होने के बाद विधानसभा परिसर स्थित विपक्ष के नेता के अपने कक्ष में तेजस्वी यादव ने संवाददाताओं के साथ अनौपचारिक बातचीत की. इस दौरान उनसे मिलकर उनका कुशलक्षेम जानने के लिए राजद के विधायकों का भी तांता लगा रहा.

सार्वजनिक, राजनीतिक और संसदीय जीवन से उनकी अनुपस्थिति पर तरह-तरह के लग रहे कयासों से जुड़े सवालों के बीच संवाददाताओं के साथ बातचीत करते हुए तेजस्वी यादव सवालों को टालते चले गए.

तेजस्वी की सेहत, उनकी बीमारी, उनके नए लुक, केश विन्यास, उनके देश-विदेश में देखे जाने, भाजपा नेता तथा सांसद अमित शाह से मुलाकात, लोकसभा में पार्टी की हार के कारण उनके इस्तीफे की पेशकश जैसे सवालों की झड़ी उन पर लग रही थी.

तेजस्वी यादव बस मुस्करा कर सवालों को टालते जा रहे थे. संवाददाताओं के लाख कुरेदने पर भी तेजस्वी यादव एक परिपक्व राजनीतिज्ञ की तरह हल्के-फुल्के माहौल में सवालों को हैंडल कर रहे थे. अपने नए हेयर स्टाइल के सवाल पर अपने बालों में उंगली चलाते हुए वह खुश नजर आए और अपनी बीमारी से जुड़े सवाल और सेहत पर विस्तार से भी बताया.

लोकसभा चुनाव में राजद की करारी हार के बाद प्रतिपक्ष के नेता पद से इस्तीफा देने की उनकी पेशकश से जुड़े सवाल को तेजस्वी यादव ने अफवाह बताते हुए संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने ऐसी कोई पेशकश नहीं की है. उन्होंने मीडियाकर्मियों को ऐसी बातों पर अपना समय बर्बाद नहीं करने की सलाह दी.

तेजस्वी यादव के प्रतिपक्ष के नेता पद से इस्तीफे की पेशकश से संबंधित खबरों पर भाई वीरेंद्र ,एज्या यादव समेत कुछ प्रमुख विधायकों ने बैठक कर अपने नेता के प्रति एकजुटता दिखाते हुए ऐसा होने पर विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा करने की बात कह डाली.

बातचीत के दौरान बीच-बीच में कुछ गंभीर सवालों का हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब देते हुए तेजस्वी यादव ने चुनाव में राजद की हार की समीक्षा के लिए पार्टी की 3 सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट के बारे में अनभिज्ञता प्रकट की. इस सवाल पर उन्होंने यह कहकर विराम लगा दिया कि इस रिपोर्ट को उन्होंने अभी देखा ही नहीं है.

राजद का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के लिए दल पर दबाव बनाने हेतु इतने दिन तक वह गायब रहे, इससे जुड़े सवाल को पूरी तरह अफवाह बता कर उन्होंने इसे खारिज कर दिया. उप मुख्यमंत्री की हैसियत से बिहार सरकार की तरफ से मिले उनके बंगले से जुड़ी कथित अनियमितता पर उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें इस मामले में क्लीन चिट दे दी है.

इसके अलावा मिट्टी घोटाले में भी राज्य सरकार की तरफ से क्लीनचिट दे दी गई है. विदेश में उनके होने के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि वह भारत में थे और देश में रहकर इलाज करा रहे थे. तेजस्वी ने कहा कि उनका पासपोर्ट उनके पास है ही नहीं तो वह विदेश जा ही नहीं सकते.

दरअसल तेजस्वी यादव पर कई मामले दर्ज हैं और आईआरसीटीसी घोटाले के सिलसिले में सीबीआई और ईडी ने उनका पासपोर्ट जब्त कर रखा है. अपनी बीमारी और इलाज की जानकारी देते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि घुटने के अगले भाग के लिगामेंट टूट जाने की वजह से उन्हें काफी तकलीफ थी.

उन्होंने कहा कि वह पहले से अब काफी बेहतर हैं, किन्तु थोड़ी बहुत तकलीफ -दर्द अभी भी बाकी है जिसे व्यायाम के जरिए नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं. शुक्रवार को राजद का स्थापना दिवस है और शनिवार को इसकी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक.

इन दोनों कार्यक्रमों की तिथि करीब आती जा रही थी और राजद खेमे में तेजस्वी यादव के नहीं रहने से बेचैनी बढ़ती जा रही थी. अपने नेता के आ जाने से राजद ने राहत की सांस ली है. विधानसभा परिसर स्थित अपने कक्ष में तेजस्वी यादव ने वरिष्ठ विधायक आलोक मेहता से दोनों कार्यक्रमों की तैयारियों का जायजा लिया और इसके लिए की जा रही व्यवस्थाओं के संदर्भ में कुछ दिशा निर्देश भी दिए.

तेजस्वी यादव के सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में नहीं रहने को लेकर राजनीतिक दलों के नेता मुखर होकर उन पर हमले तो कर ही रहे थे, विधानसभा से भी उनकी अनुपस्थिति पर सवाल उठाए जा रहे थे.

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने तो नेता विरोधी दल के संसदीय आचरण पर भी सवाल उठा दिया था. उन्होंने कहा कि संसदीय प्रणाली और परंपराओं में तेजस्वी यादव को कोई भरोसा नहीं है तभी तो पटना में रहने के बावजूद वह सदन की कार्यवाही से नदारद रहे हैं.

सुशील मोदी ने यह भी कहा कि अपनी रहस्यमयी गोपनीयता से तेजस्वी यादव ने जनता के साथ-साथ विधानसभा का भी अनादर किया है. सत्तारूढ़ दल के विधायक रत्नेश सदा ने इसे व्यवस्था का मामला बताते हुए बुधवार को सदन में सभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी का इस तरफ ध्यान भी आकर्षित करने की कोशिश की थी.

भाजपा के कई नेताओं ने भी इसी तरह के सवाल उठाए. अपनी अनुपस्थिति से राजनीतिक सरगर्मी के बीच तेजस्वी यादव शनिवार को अचानक सोशल मीडिया में अपने ट्विटर के जरिये अवतरित हो गए थे.

ट्वीट के माध्यम से उन्होंने सार्वजानिक जीवन से गायब रहने के कारण का खुलासा करते हुए अपनी लिगामेंट से जुड़ी बीमारी का उल्लेख किया था. गुरुवार को विधानसभा स्थित अपने कक्ष में तेजस्वी यादव ने बताया कि लिगामेंट और घुटने के अगले हिस्से के क्रूसिएट लिगामेंट के क्षतिग्रस्त होने से परेशान थे जिसका वह इलाज करा रहे थे .

संवाददाताओं के साथ बातचीत में उन्होंने देश में ही रह कर इसका इलाज कराने की बात कही किन्तु अपने ट्वीट में उन्होंने यह नहीं बताया था कि इस बीमारी का इलाज कहां करा रहे हैं जिसकी वजह से उनके देश-विदेश में होने के बारे में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे.

हालांकि उन्होंने इस तरह के सभी कयासों पर अपनी उपस्थिति से विराम लगा दिया. उनकी अनुपस्थिति से उन पर हो रही राजनीतिक छींटाकशी और मीडिया में उन पर चल रही मसालेदार खबरों पर भी शनिवार को ट्वीट कर उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया था.

सामाजिक न्याय के लिए अपना संघर्ष जारी रखने पर ट्वीट करने वाले तेजस्वी यादव मुजफ्फरपुर में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी कि बुखार से काल के गाल में समा जाने वाले सैकड़ों बच्चों की मौत पर भी एक महीने तक चुप रहे.

विधानसभा परिसर स्थित अपने कक्ष में संवाददाताओं से घिरे तेजस्वी यादव को मुजफ्फरपुर में इतनी तादाद में बच्चों की हुई मौत का ध्यान आया और उन्होंने पीड़ित परिवारों से मिलने का मन बनाया. तेजस्वी यादव यह नहीं बता सके कि अपने बच्चों को खोने वाले ऐसे सैंकड़ों माता-पिता से मिलने वह कब जाएंगे? हिन्दुस्थान समाचार/रजनी

2 thoughts on “विधानसभा में दिखे तेजस्वी, RJD विधायकों में दौड़ी खुशी की लहर”

Leave a Reply

%d bloggers like this: