दिल्ली में ‘तैमूरी ताकत’

एमके प्रमोद

तैमूर नगर की ‘तैमूरी ताकत’ के संरक्षण में चल रहे गैर कानूनी कारनामे ने सिर्फ वहां रहने वाले उमेश कुमार को ही मजबूर नहीं बनाया है, बल्कि इसके सामने दिल्ली पुलिस ने भी घुटने टेक दिए हैं.

इसने वोट की राजनीतिक व्यवस्था के साथ गठजोड़ कर लिया है. इसके चलते दिल्ली सरकार के कुछ विभाग व दिल्ली पुलिस के बीच दस्तावेजी फुटबॉल का खेल भी अरसे से खेला जा रहा है.

बॉलीवुड के सितारों के लिए अपने बच्चे का नाम समरकंद के लुटेरे तैमूर लंग के नाम पर तैमूर रखना एक फैशन हो सकता है लेकिन दिल्ली के महारानी बाग इलाके के पास स्थित मोहल्ले का नाम तैमूर नगर रखना वहां निवास करने वाले लोगों के लिए कम से कम अमन का मुलाहजा नहीं कर रहा है.

दिल्ली में मृतप्राय: यमुना के किनारे बसा तैमूर नगर अपनी ‘तैमूरी ताकत’ का प्रदर्शन यदा-कदा करता रहता है. स्मैक, हेरोइन, गांजा व अन्य जहरीले नशे के आपूर्ति केंद्र में तब्दील हो रहा तैमूर नगर विगत दो दशकों से सरकार के गले की हड्डी बना हुआ है जिसे वह न तो निगल सकती है और न ही थूक सकती है.

क्योंकि ऐसा करने के लिए उसकी राह में एक तरफ गड्ढा है तो एक तरफ खाई. अगर पुलिस इन तैमूरी ताकतों के खिलाफ कार्रवाई करती है तो उसे एक तरफ नशे की आपूर्ति करने वाले बिगड़ैल बांग्लादेशियों का सामना करना पड़ेगा तो दूसरी तरफ इसे शुचिता का जाल बुनकर अपने को दिल्ली की राजनीति….

पूरा लेख पढ़ें यथावत के 16-28 फरवरी के अंक में

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