पिथौरागढ़ से सटे नेपाल में मिला कोरोना वायरस का संदिग्ध मरीज, सीमा पर हाई अलर्ट

  • नेपाल के रास्ते भारत आने वाले चीन के एक नागरिक को 11 फरवरी को वापस भेजा गया
  • डीजी (हेल्थ) ने दिए टनकपुर और बनबसा में डॉक्टरों की विशेष टीमों की तैनाती के आदेश
  • चीन से सटे चमोली जिले में कोरोना वायरस को लेकर विशेष एहतियात बरतने के निर्देश

देहरादून, 14 फरवरी (हि.स.). उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद से सटे नेपाल में कोरोना वायरस से संक्रमित एक संदिग्ध मरीज मिलने से राज्य सरकार के कान खड़े हो गए हैं. यह संदिग्ध मरीज चीन से लौटा एक छात्र है, जो बनबसा से करीब 75 किलोमीटर दूर नेपाल के कैलाली जिले के मुख्यालय धनगढ़ी में मिला है.

मरीज को वहां के सेती अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उसे अस्पताल के विशेष कक्ष में गहन निगरानी में रखा गया है. प्रथमदृष्ट्या उसमें कोरोना वायरस से मिलते जुलते लक्षण पाए गए हैं. डॉक्टरों ने मरीज को जो सैम्पल लिया है, वह आज जांच के लिए काठमांडू लैब में भेजा जाएगा.

इसे देखते हुए इस पार बनबसा चिकित्साधिकारी की हिदायत पर सीमा पर तैनात स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीमें अलर्ट हो गई हैं. वह नेपाल से आने वाले प्रत्येक व्यक्ति के स्वास्थ्य की गहन जांच पड़ताल कर रही हैं. खासतौर पर जो मरीज एम्बुलेंस में लाए जा रहे हैं, कोराना वायरस के मद्देनजर उनकी खास तौर पर स्वास्थ्य जांच की जा रही है.

बनबसा के चिकित्सा अधिकारी डाक्टर मोहम्मद उमर के अनुसार इस आशय की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है. सीमा पर नेपाल से आने वाले लोगों की सघन स्वास्थ्य जांच की जा रही है. बताया गया है कि स्वास्थ्य महानिदेशक की ओर से नैनीताल से आठ चिकित्सकों की खास टीम को नेपाल के सीमावर्ती इलाकों टनकपुर और बनबसा के अस्पतालों में तैनात करने के आदेश जारी किए गए हैं.

इससे पहले सिडकुल की योयोगो कम्पनी में इंजीनियर के पद पर कार्यरत एक चीनी नागरिक सुन यून कैन को 11 फरवरी को भारत ने उस वक्त नेपाल वापस भेज दिया था, जब वह नेपाल के रास्ते भारत आ रहा था. एहतियातन किए गए स्वास्थ्य परीक्षण में सीमा पर तैनात चिकित्सा टीम को सुन यून कैन स्वस्थ नहीं पाया गया था.

पता चला है कि सितारगंज स्थित योयोगो कंपनी में कार्य करने वाले इस चीनी नागरिक ने दिल्ली से प्रवेश नहीं मिलने पर भारत-नेपाल की खुली सीमा का लाभ उठाकर इस रास्ते से भारत में प्रवेश की योजना बनाई. इसके बावजूद भारतीय अधिकारियों और चिकित्सा दल की सतर्कता के चलते वह इसमें सफल नहीं हो पाया और उसे बनबसा सीमा से भारत सरकार के निर्देश पर सुरक्षा एजेंसियों ने नेपाल लौटा दिया.

हालांकि बनबसा के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. मो. उमर की मानें तो सितारगंज स्थित योयोगो कंपनी में काम करने वाले सभी कर्मचारियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है. किसी भी कर्मचारी में कोरोना वायरस के लक्षण नहीं पाए गए हैं.

उधर, चीन से सटे चमोली जिले में कोरोना वायरस को लेकर बेहद सतर्कता बरती जा रही है. स्वास्थ्य विभाग ने सीमावर्ती ब्लाक जोशीमठ में एक मेडिकल टीम का गठन किया है. टीम के साथ एक एंबुलेंस भी 24 घंटे तैनात की गई है. जिला चिकित्सालय के साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक आइसोलेशन वार्ड भी बनाया गया है.

जिलाधिकरी स्वाति एस भदौरिया ने जिला पर्यटन अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि जिले के होटलों में चीन से पहुंचने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की सूचना तत्काल स्वास्थ्य विभाग को मुहैया कराई जाए.

चमोली के मुख्य चिकित्साधिकारी डा. केके सिंह के अनुसार जिले में चीन से लगी सीमा के गांव लौंग, फाक्ती, पंगरासू, गाड़ी ब्रिज, सुरांई थोटा, तोलमा, सूकी, भलगांव, लाता, रैंणी, पैंग, सुभांई, भविष्य बदरी, तपोवन, पांडुकेश्वर, बैनाकुली और हनुमान चट्टी आदि क्षेत्र में भोटिया जनजाति के गांवों में कोरोना वायरस के प्रति जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि हालांकि जिले में अभी तक किसी भी व्यक्ति में कोरोना वायरस के लक्षण नहीं मिले हैं. हालांकि चीन से 31 दिसम्बर, 2019 को लौटे घाट ब्लॉक के एक व्यक्ति के बारे में पांच फरवरी को जानकारी मिली थी, जिसका यहां के सीएचसी में नियमित चेकअप किया जा रहा है.

चीन से 31 दिसम्बर, 2019 को ही लौटे एक अन्य व्यक्ति को भी तबियत बिगड़ने पर ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया गया है. फिलहाल डॉक्टरों को इन दोनों मरीजों में कोरोना वॉयरस के कोई लक्षण नहीं मिले हैं.

हिन्दुस्थान समाचार/दधिबल/गोविन्द

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