ऐसा था सुषमा स्वराज का व्यक्तित्व, घर, परिवार और राजनीति में ऐसे बिठाया सामंजस्य….

नई दिल्ली. पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का मंगलवार रात दिल्ली के एम्स में निधन हो गया. सुषमा स्वराज 67 साल की थीं. सुषमा स्वराज के निधन से भारतीय जनता पार्टी ही नहीं, बल्कि विरोधी दलों के नेता भी से स्तब्ध हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश-दुनिया के तमाम नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है. आज दोपहर तीन बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

महिला राजनेताओं में इंदिरा गांधी के बाद उनका नाम हमेशा आदर से लिया जाएगा. विशुद्ध भारतीय लिबास और बड़ी लाल बिंदी में उनकी एक छवि सभी के दिमाग में दर्ज है. एक महिला नेता होने के साथ साथ वह बेहतरीन विदेश मंत्री भी रहीं.

विशुद्ध भारतीय लिबास और बड़ी लाल बिंदी में उनकी एक छवि सभी के दिमाग में दर्ज है. उनके बारे में कहा जाता है कि एक महिला नेता होने के साथ साथ वह बेहतरीन विदेश मंत्री भी रहीं.

सुषमा स्वराज उन चंद महिलाओं में से एक थी जिन्होंने घर और देश की जिम्मदारियों को बखूबी निभाया. साथ ही महिलाओँ के लिए एक उदाहरण बनी.

सुषमा स्वराज का व्यक्तिगत जीवन

सुप्रीम कोर्ट के वकील से की थी शादी- सुषमा स्वराज ने स्वराज कौशल से शादी की है. सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल समाजवादी कैंप से जुड़े रहे हैं. स्वराज कौशल सुषमा स्वराज के साथ सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता के पद पर कार्यरत थे. स्वराज कौशल सबसे कम उम्र में राज्यपाल का पद प्राप्त करने वाले व्यक्ति है. वो मिजोरम के राज्यपाल रहे है.

स्वराज कौशल 6 साल तक राज्यसभा सांसद भी रहे है. स्वराज दम्पति की उपलब्धियों के लिए उनका नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया है. सुषमा स्वराज और स्वराज कौशल की एक बेटी है जिसका नाम बांसुरी है बांसुरी लंदन के इनर टेम्पल में वकालत की पढ़ाई कर रही है.

बेटी भी हैं वकील
सुषमा स्वराज और कौशल स्वराज की बेटी भी है, जिनका नाम बांसुरी स्वराज है. ऑक्सफोर्ड से ग्रेजुएट बांसुरी वकालत करती हैं. इनर टेम्पल से कानून में बैरिस्टर की डिग्री लेने के बाद अपने पिता की तरह क्राइम लॉयर हैं.

राजनीति में कैसे आईं?
नई पीढ़ी की नेता मानी जाने वाली सुषमा स्वराज ने भारतीय राजनीति में अपनी शुरुआत वर्ष 1970 में छात्र नेता के रूप में की थी. इन्होंने इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ कई विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे.

वो एक आसाधारण वक्ता और प्रचारक हैं, जिन्होंने जनता पार्टी में शामिल होने के बाद आपातकाल के विरोध में सक्रिय रूप से भाग लिया था. इन्होंने हरियाणा में महज़ 27 साल की उम्र में ही जनता पार्टी की राज्य अध्यक्षा का पद संभाला था.

भारतीय राजनीति में इनकी भूमिका ने इन्हें पहले दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री और बाद में विपक्ष की पहली महिला नेता का पद दिलाया.

सुषमा स्वराज की शिक्षा- सुषमा स्वराज ने अम्बाला छावनी के एस.डी कॉलेज से बीए की पढ़ाई करने के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली.

कॉलेज में पढ़ाई के दौरान अपनी सोच और हर बात को कहने की आदत ने उन्हें सर्वोच्चन वक्ता का सम्मान मिला. यही नहीं सुषमा स्वराज कॉलेज के दिनों में एनसीसी की सर्वोच्च कैडेट भी रही.

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