बीएस-4 वाहनों की बिक्री सीमा बढ़ाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट नहीं करेगा सुनवाई

नई दिल्ली, 18 मार्च (हि.स.). सुप्रीम कोर्ट ने बीएस-4 मानक की गाड़ियों की बिक्री की सीमा 31 मार्च से बढ़ाने की मांग को लेकर फेडरेशन ऑफ़ ओटोमोबील डीलर एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है.

एसोसिएशन ने अपनी याचिका में कहा था कि कोरोना वायरस की वजह से गाड़ियों की बिक्री नहीं हो पाई इसलिए सुप्रीम कोर्ट पुराने आदेश में बदलाव करे.

सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश के मुताबिक 31 मार्च के बाद बीएस-4 की गाड़ियों की बिक्री पर रोक है. 1 अप्रैल से बाजार में केवल बीएस-6 गाड़िया ही बाजार में बिक सकती हैं. पिछले 14 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने आटोमोबाइल कंपनियों की 31 मार्च 2020 के बाद बीएस-4 वाहनों की बिक्री की अनुमति देने से इनकार कर दिया था.

कोर्ट ने आटोमोबाइल एसोसिएशन की उस मांग को खारिज कर दिया था जिसमें कहा गया था कि अप्रैल महीने तक उनके द्वारा निर्मित बीएस-4 वाहनों का स्टॉक खत्म करने की इजाजत दी जाए.

बता दें कि 24 अक्टूबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि 31 मार्च 2020 के बाद बीएस-4वाहनों की बिक्री नहीं की जा सकती है. आटोमोबाइल निर्माताओं की दलील थी कि वे अंतिम समय सीमा खत्म होने के पहले बीएस-4 वाहनों का उत्पादन बंद कर देंगे लेकिन अपना स्टॉक खत्म करने के लिए छह महीने का ग्रेस पीरियड दिया जाए लेकिन कोर्ट ने उनकी दलील खारिज करते हुए कहा कि 31 मार्च 2020 के बाद न तो बीएस-4 वाहनों की बिक्री होगी और न ही उत्पादन.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि 1 अप्रैल 2020 से देश में सिर्फ बीएस-6 गाड़ियों की बिक्री होगी. यानि 1 अप्रैल 2020 से केवल बीएस-6 वाली गाड़ियां का ही उत्पादन होगा. केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर ये बात बताई थी. पेट्रोलियम मंत्रालय ने अलग तरह की गाड़ियों के लिए डीज़ल की अलग कीमत रखने के सुझाव को अव्यवहारिक बताया था.

हिन्दुस्थान समाचार/संजय/सुनीत

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