Karnataka Crisis: विधायकों के इस्तीफे पर फैसला लें स्पीकर- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली. कर्नाटक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है. कर्नाटक में 12 दिनों से जारी सियासी उठापटक के बीच बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में बागी विधायकों की अर्जी पर अपना फैसला सुना दिया. कोर्ट ने जेडीएस-कांग्रेस के 16 बागी विधायकों की इस्तीफे पर फैसला स्पीकर पर छोड़ दिया है.

कर्नाटक में कल विश्वास मत पेश होगा. सुप्रीम कोर्ट ने विधायकों को सत्र में शामिल होने का विकल्प दिया है. कोर्ट ने कहा है कि स्पीकर नियम के अनुसार फैसला लें. उधर कर्नाटक के स्पीकर ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है.

इस फैसले से 14 महीने पहले बनी कुमारस्वामी सरकार को तगड़ा झटका लगा है. विधायकों द्वारा दायर इस याचिका में कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष को कांग्रेस-जद (एस) के बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने की मांग की गई थी.

कोर्ट ने कहा है कि बागी विधायकों पर व्हिप लागू नहीं होगा. बागी विधायकों पर किसी तरह का दबाव नहीं डाला जा सकता है. स्पीकर का आदेश कोर्ट के सामने पेश किया जाए. हमारा मकसद सिर्फ संवैधानिक संतुलन बनाए रखना है. विधायक विधानसभा में आने के लिए स्वतंत्र हैं.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने ट्वीट किया है. ऑपरेशन कमल विफल हुआ है. सत्यमेव जयते.

बागी विधायकों ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, हम सभी एक साथ हैं, हम अपने निर्णय पर अडिग है. विधानसभा में जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता है’

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता बी.एस. येदियुरप्पा ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, जिन विधायकों ने इस्तीफा दिया है, वे प्रभावित नहीं होंगे. कल सीएम विश्वास मत पेश करेंगे और वह जनादेश खो देंगे। आइए देखते हैं कि क्या होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. कुमारस्वामी और विधानसभा अध्यक्ष ने बागी विधायकों की याचिका पर विचार करने के न्यायालय के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया.

बागी विधायकों ने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार बहुमत खो चुकी गठबंधन सरकार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं. मुख्यमंत्री कुमारस्वामी गुरुवार को विधानसभा में विश्वासमत का प्रस्ताव पेश करेंगे.

अगर विधानसभा अध्यक्ष इन बागी विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लेते हैं तो उनकी सरकार उससे पहले ही गिर सकती है. हालांकि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि वह विधानसभा अध्यक्ष को अयोग्यता पर फैसला करने से नहीं रोक रही है.

बल्कि उनसे सिर्फ यह तय करने के लिए कह रही है क्या इन विधायकों ने अपनी मर्जी से इस्तीफा दिया है. वहीं पीठ ने कहा कि उसने दशकों पहले दल-बदल कानून की व्याख्या करने के दौरान विधानसभा अध्यक्ष के पद को ‘काफी ऊंचा दर्जा’ दिया था और ‘संभवत: इतने सालो के बाद उस पर फिर से गौर करने की जरूरत है.

इसके साथ ही पीठ ने कहा कि विधायकों के इस्तीफे और अयोग्यता के मुद्दे पर परस्पर विपरीत दलीलें हैं और ‘‘हम जरूरी संतुलन बनाएंगे. सत्तारूढ़ गठबंधन दल को फिलहाल विधानसभा में 117 विधायकों का समर्थन है.

इसमें कांग्रेस के 78, जद (एस) के 37, बसपा का एक और एक मनोनीत विधायक शामिल हैं. इसके अलावा विधानसभा के अध्यक्ष का भी एक मत है. वहीं दो निर्दलीय विधायकों के समर्थन से 225 सदस्यीय विधानसभा में विपक्षी भाजपा को 107 विधायकों का समर्थन हासिल है.

इन 225 सदस्यों में एक मनोनीत सदस्य और विधानसभा अध्यक्ष भी शामिल हैं. अगर इन 16 बागी विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाता है तो सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायकों की संख्या घटकर 101 हो जाएगी.

10 बागी विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उनका इस्तीफा स्वीकार करना ही होगा. क्योंकि मौजूदा राजनीतिक संकट से उबरने का अन्य कोई उपाय नहीं दिखाई दे रहा है. ऐसे में विधानसभा अध्यक्ष सिर्फ यह तय कर सकते हैं कि इस्तीफा स्वैच्छिक है या नहीं.

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