1984 सिख विरोधी दंगा- SC ने पलटा हाईकोर्ट का फैसला, 15 दोषी बरी

नई दिल्ली. SC ने 1984 के सिख विरोधी दंगों में त्रिलोकपुरी मामले में दोषी करार दिये गये 15 लोगों को राहत देते हुए बरी कर दिया है. दिल्ली हाईकोर्ट ने नवंबर में इन लोगों के दोषी होने और निचली अदालत से मिली सजा को सही ठहराते हुए पांच साल की सजा बरकरार रखी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी को बरी करते हुए कहा कि पुलिस खुद मानती है कि दंगों में इन लोगो को किसी ने नहीं देखा है और ना ही किसी ने इनकी पहचान की है.

इस मामले में हाईकोर्ट अपना फैसला पहले दे चुका था जिसमें 15 लोगों को दोषी ठहराया गया था, उसी फैसले को पलटते हुए अब सुप्रीम कोर्ट ने नया फैसला सुनाया है.

कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि इन 15 लोगों के खिलाफ न तो दंगों में शामिल होने के सीधे सबूत मिले हैं और न ही गवाहों ने उनकी पहचान की है. इसी कारण इन्हें बरी कर दिया गया है.

28 नवंबर 2018 को दिल्ली हाईकोर्ट ने त्रिलोकपुरी में 1984 में हुए दंगों के संबंध में 88 दोषियों को निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखा था. निचली अदालत ने सभी दोषियों को 5 साल की सजा दी थी.

1996 में निचली अदालत ने दोषियों को पांच-पांच साल की कैद की सजा सुनाई थी. इस मामले में 95 शव बरामद होने के बाद भी किसी दोषी पर हत्या की धारा में केस दर्ज नहीं हुआ था. इनके खिलाफ कर्फ्यू उल्लंघन कर हिंसा फैलाने का आरोप था.

सिख विरोधी दंगे फैलाने के मामले में इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई थी. न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति विनोद गोयल की पीठ ने कुमार को आपराधिक षड्यंत्र रचने, शत्रुता को बढ़ावा देने, सांप्रदायिक सद्भावना के खिलाफ कृत्य करने का दोषी ठहराया था.

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