सुनील गावस्‍कर ने टीम मैनजमेंट के रवैये पर उठाए सवाल, कहा-समझ से परे टीम का चयन

खेल डेस्क. भारतीय क्रिकेट टीम हमेशा अपनी चयन प्रक्रिया को लेकर विवादों में बनी रहती है. इसकी एक वजह ये है कि यहां कब किस खिलाड़ी पर गाज गिर जाए और कब किसी पर टीम मैनजमेंट मेहरबान हो जाए इसके बारे में पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता हैं.

भारतीय टीम मैनेजमेंट की चयन प्रकिया पर दिग्‍गज बल्‍लेबाज सुनील गावस्‍कर ने गंभीर सवाल उठाए हैं. गावस्‍कर भारतीय टीम की प्लेइंग इलेवन में बार-बार बदलाव से काफी नाराज हैं. विशाखापत्‍तनम टेस्‍ट में रोहित शर्मा को बतौर सलामी बल्‍लेबाज मौका दिया गया है.

दूसरी ओर ऋषभ पंत को टीम से बाहर कर उनकी जगह ऋद्धिमान साहा को प्‍लेइंग इलेवन में शामिल किया गया. विंडीज दौरे पर भारतीय प्‍लेइंग इलेवन का हिस्‍सा नहीं बन पाए रविचंद्रन अश्विन भी टीम में शामिल हैं.

सीरीज के पहले टेस्ट में कमेंट्री करते हुए सुनील गावस्‍कर ने कहा कि अश्विन की प्रतिभा वाले खिलाड़ी को स्‍थाई तौर पर भारतीय प्‍लेइंग इलेवन का हिस्‍सा होना चाहिए. चाहे टीम इंडिया कहीं भी मैच खेल रही हो.

उन्होंने कहा कि आप बिना कुछ किए ही आईसीसी के नंबर-1 गेंदबाज नहीं बन सकते हैं. अश्‍विन में दुनिया के किसी भी कोने में विकेट निकालने की कला है. टीम मैनेजमेंट को इस बात को समझकर अश्विन का समर्थन करना चाहिए.

गावस्‍कर ने कहा, “मुझे याद है पिछले साल अफ्रीका दौरे पर भुवनेश्‍वर कुमार ने पहले ही टेस्‍ट मैच में काफी विकेट चटकाए थे. वो गेंद को अच्‍छे से स्विंग करा रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्‍हें टीम से ड्रॉप कर दिया गया था.

ऐसा ही टीम के ओपनर मुरली विजय के साथ भी हुआ. गावस्‍कर का मानना है कि टीम का चयन इस तरह किया जाए जिससे एक खिलाड़ी अपना आत्मविश्वास न खोए. गावस्कर से पहले टीम इंडिया के विस्फोटक बल्लेबाज युवराज सिंह भी टीम मैनजमेंट के पक्षपाती रवैये पर सवाल उठा चुके हैं.

युवी ने एक टीवी चैनल की इंटरव्यू में कहा था कि ये किसी को समझ नहीं आ रहा है कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में कार्तिक के साथ नाइंसाफी क्यों हुई. उनसे पहले टीम में उन युवा खिलाड़ियों को जगह दी गई जिनके पास अनुभव की कमी थी.


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