सुनंदा पुष्कर मौत : कोर्ट शशि थरूर पर आरोप तय करने के लिए 20 और 22 अगस्त को दलीलें सुनेगा

नई दिल्ली: दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले में आरोपित शशि थरूर के खिलाफ आरोप तय करने के मामले में 20 और 22 अगस्त को दलीलें सुनेगा.

स्पेशल जज अरुण भारद्वाज ने अभियोजन पक्ष को विशेषज्ञों से दिशानिर्देश लेने के लिए दस्तावेज साझा करने की अनुमति दे दी. कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को किसी तीसरे पक्ष से दस्तावेज साझा करने से मना किया है.

कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष जिन विशेषज्ञों से दस्तावेज साझा करेगा वे किसी दूसरे से इसे साझा नहीं करेंगे. कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया कि वो विशेषज्ञों से राय लेने के लिए दस्तावेज साझा करने से पहले कोर्ट के आदेश की प्रति उपलब्ध कराएं.

अभियोजन पक्ष उन विशेषज्ञों का रिकॉर्ड भी बनाकर रखेगा जिनकी वो मदद लेने की योजना बना रहा हो. 24 मई को कोर्ट ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी को पब्लिक प्रोसिक्यूटर का सहयोग करने की अनुमति देने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी थी.

कोर्ट ने स्वामी की उस मांग को भी खारिज कर दिया था कि साक्ष्यों को नष्ट करने पर दिल्ली पुलिस की विजिलेंस रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश की जाए.

चार फरवरी को एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल ने सुब्रमण्यम स्वामी की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने खुद को अभियोजन की मदद करने की मांग की थी.

हालांकि कोर्ट ने इस मामले की विजिलेंस रिपोर्ट सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर काम आ सके. एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल की कोर्ट ने चार फरवरी को इस मामले को ट्रायल के लिए सेशंस कोर्ट में भेज दिया था.

14 मई, 2018 को दिल्ली पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया था। आरोप पत्र में सुनंदा पुष्कर के पति और कांग्रेस नेता शशि थरूर को आरोपी बनाया गया है. शशि थरूर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए और 306 के तहत आरोपी बनाया गया है.

आरोप पत्र में कहा गया है कि सुनंदा पुष्कर की मौत शशि थरूर से शादी के तीन साल, तीन महीने और 15 दिनों में हो गई थी. दोनों की शादी 22 अगस्त, 2010 को हुई थी. एक जनवरी, 2015 को दिल्ली पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत एफआईआर दर्ज की थी.

हिन्दुस्थान समाचार/संजय

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