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देहरादून

नीट में सफल छात्रों की असल परीक्षा अब है। देशभर के मेडिकल कालेजों में दाखिले की राह उनके लिए आसान नहीं होगी। कड़वा सच यह है कि इस साल नीट क्वालिफाई करने वाले महज 8.89 फीसदी विद्यार्थियों का ही डॉक्टरी की पढ़ाई का सपना पूरा होगा। जबकि 91.11 फीसदी विद्यार्थियों को नीट परीक्षा पास होते हुए भी अन्य विकल्प तलाशने होंगे।       

देशभर में मात्र 70 हजार 878 एमबीबीएस की सीटें

इस साल देशभर में 70 हजार 878 एमबीबीएस की सीटें है। जबकि नीट के जरिए 7,97,042 विद्यार्थी सफल हुए है। विशेषज्ञ डीके मिश्रा के अनुसार दाखिले के लिए प्रतिस्पर्धा कड़ी है। देशभर में 37 फीसदी से अधिक चिकित्सकों के पद रिक्त है। कारण यह कि सफल होने वाले छात्रों की तुलना में मेडिकल कालेजों में सीटें सीमित हैं।

14 हजार रैंक तक सरकारी कॉलेज की उम्मीद
इस साल देश के 7,97,042 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा क्वालीफाई की है। पिछले साल 11 हजार तक रैंक हासिल करने वालों को सरकारी मेडिकल कॉलेज मिल गया था। इस साल 13-14 हजार की रैंक वाले विद्यार्थियों को सरकारी कॉलेज मिलने की उम्मीद है। इसके बाद वाले विद्यार्थी निजी मेडिकल कॉलेज में दाखिला ले सकते है। वहीं आयुष, वेटनरी में भी नीट के अंकों के आधार पर दाखिला होता है। जिन विद्यार्थियों को देश से ही एमबीबीएस करनी है उनको रैंक सुधार के लिए दोबारा तैयारी करनी होगी।

16.66 फीसदी अंक लाने वाले भी पास
खास बात यह है कि इस साल नीट परीक्षा में 720 में से मात्र 16.66 फीसदी यानी 107 अंक लाने वाले परीक्षार्थियों को भी परीक्षा में उत्तीर्ण घोषित किया गया है। पिछले चार वर्षो के आंकड़ों पर गौर करें तो लगभग डेढ़ से दो लाख विद्यार्थी हर साल बढ़ रहे है। लेकिन मेडिकल कॉलेजों की संख्या उस अनुपात में नहीं बढ़ पा रही है। देश में एमबीबीएस की सीट कम होने के कारण काफी विद्यार्थी विदेश से भी डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे है।

ऐसे समझें  गणित
नीट में पंजीकृत अभ्यर्थी : 15 लाख 19 हजार 375
परीक्षा में शामिल हुए : 14 लाख 10 हजार 755
नीट में पास हुए अभ्यर्थी : 7,97,042
देश में मेडिकल कॉलेजों में सीट : 70 हजार 878
देशभर में मेडिकल कॉलेज : 529

हिन्दुस्थान समाचार/रवि

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