बेहतर क्षमता प्रबंधन से सफलता

मिलन सिन्हा

हमारे विद्यालय-महाविद्यालय-विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से मुलाक़ात के क्रम में मैंने यह पाया है कि उनमें अपेक्षित संभावना एवं क्षमता की कमी नहीं है. मेधा और मेहनत में भी वे पीछे नहीं हैं. 

सभी जानते हैं कि उत्साह, उमंग और उर्जा भी व्यक्ति के सोच और शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य पर निर्भर करता है. आम विद्यार्थियों की संभावना को परफॉरमेंस में तब्दील करने की स्वभाविक चाहत से भी हम वाकिफ हैं. 

इसके बावजूद सभी विद्यार्थी अपने मुकाम को हासिल नहीं कर पाते हैं. इसके कई कारण हो सकते हैं. क्षमता प्रबंधन इनमें से एक बड़ा कारण है. इसे एकाधिक ज्वलंत उदाहरण के मार्फत सरलता से समझने की कोशिश करते हैं. 

हाल ही में संपन्न विवो आईपीएल क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान आंद्रे रसेल, महेन्द्र सिंह धोनी, क्रिस गेल, हार्दिक पंड्या जैसे कई खिलाड़ियों ने अपने-अपने क्षमता प्रबंधन का शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी टीम को अप्रत्याशित जीत दिलाई. 

रॉयल चैलेंजर बंगलोर टीम के खिलाफ कोलकता नाईटराइडर्स की ओर से खेलते हुए एक मैच में रसेल ने मात्र तेरह बॉल पर सात छक्का और एक चौके के साथ नाबाद 48 रनों की बदौलत अत्यंत आश्चर्यजनक तरीके से अपनी टीम को विजय दिलाई. 

चेन्नई सुपर किंग्स कप्तान धोनी ने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ एक मैच में कुछ ऐसा ही प्रदर्शन कर अपनी टीम को विजयी बनाया. 

बल्लेबाज के रूप में कब किस बॉल को किस तरह खेलना है जिससे कि अपने विकेट को बचाते हुए मात्र 20 ओवर के मैच में कम से कम गेंदों पर ज्यादा से ज्यादा रन बटोरते हुए विपक्षी टीम के खिलाफ जीत हासिल करें, यही उस खिलाड़ी की उच्च क्षमता प्रबंधन को रेखांकित करता है. 

उसी प्रकार एक बॉलर अपनी गेंदबाजी के दौरान बल्लेबाज विशेष के बैटिंग स्टाइल, फील्ड सेटिंग, पिच की स्थिति आदि को घ्यान में रखकर जब बुद्धमानी से गेंदबाजी करता है तो बल्लेबाज या तो जल्दी आउट हो जाता है या बहुत कम रन बना पाता है. 

ऐसे सभी खिलाड़ी विपरीत परिस्थिति में भी अपनी  क्षमता का समुचित उपयोग करना जानते हैं और कदाचित ही अपनी क्षमता को जाया होने देते हैं. 

एक बेमिसाल उदाहरण और. हाल ही में जिस एक शख्स की देश के कोने-कोने में खूब चर्चा हुई उसे आप सब अच्छी तरह जानते हैं. हां, मैं वायुवीर  विंग कमांडर अभिनन्दन वर्धमान की बात  कर रहा हूं. 

आज अभिनन्दन सभी भारतीयों, खासकर विद्यार्थियों और युवाओं के सुपर हीरो हैं. हो भी क्यों नहीं. उन्होंने देश के सामने जिस धैर्य, संकल्प, संतुलन, वीरता और पराक्रम की मिसाल पेश की है उसका गुणगान स्वाभाविक रूप से सब ओर हो रहा है. 

पूरे प्रकरण में काबिले गौर बात यह रही कि बेहद चुनौतीपूर्ण एवं बाद में बहुत विपरीत परिस्थिति में भी अभिनंदन ने यथोचित निर्णय  लिए और उसे बड़ी कुशलता से कार्यान्वित भी किया. 

साथ ही उन्होंने शारीरिक एवं मानसिक दोनों स्तर पर अपनी क्षमता प्रबंधन की उच्चतम मिसाल पेश की. उपर्युक्त कुछ उदाहरणों से यह बात साफ तौर पर उभर कर आती है कि जीवन में अपनी क्षमता पर विश्वास करना.

उसे उत्तरोत्तर विकसित करना जितना जरुरी है, उतना ही जरुरी है उसका प्रबंधन. कहते हैं न कि लोहा जब गरम हो तभी चोट करना फायदेमंद होता है. 

उसी तरह प्रतियोगिता परीक्षा हो या हो खेल का मैदान, अगर “हम कौन-सा बॉल खेलें, कौन-सा बॉल छोड़ें” के तर्ज पर जीवन की छोटी-बड़ी परीक्षाओं में अपनी क्षमता का प्रबंधन करते हुए तदनुरूप प्रदर्शन कर सकें तो कोई भी जीत हमसे दूर नहीं जा सकती है. 

सार-संक्षेप यह कि हरेक विद्यार्थी के जीवन में उतार-चढ़ाव आता है – कम या ज्यादा. सफलता-असफलता से भी वे सब रूबरू होते रहते हैं, लेकिन अगर वे बीच-बीच में अपनी क्षमता प्रबंधन की खुद ही गहरी समीक्षा करते हैं.

अपनी कमियों में सुधार लाकर आगे बेहतर क्षमता प्रबंधन करते हैं, तो वे भी बेहतर उपलब्धि के हकदार बनते रहेंगे.

पूरा लेख पढ़ें युगवार्ता के 16 जून के अंक में…

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