अब PUBG खेलने वालों की खैर नहीं

नई दिल्ली. आप भले ही गेम के शौकीन न हो लेकिन अपने आस पास के लोगों से आपने पबजी गेम का नाम तो सुना ही होगा. पबजी गेम का जादू इस वक्त पूरी दुनिया में छाया हुआ है लेकिन पबजी गेम को लेकर भारत में भी कम दीवनागी नहीं है.

पबजी यानी प्लेयर अन-नोन बैटल ग्राउंड को सिंगल या मल्टीप्लेयर मोड में खेला जाता है. जिसमें अपने प्लेयर का बचाव करते हुए गेम में मौजूद बाकि प्लेयर्स को मारना पड़ता है. इसे खेलने वाला अपनी टीम के साथ आइलैंड में उतरता है और उसे वहां छिपे बाकि खिलाड़ियों को मारने का टास्क मिलता है.

इसमें हर लेवल के लोगों के लिए कुछ न कुछ है. यूजर को गेम के अंत तक खुद को बचाकर रखना पड़ता है. इस ऑनलाइन गेम में अच्छे ग्राफिक्स, पॉवरफुल साउंड और मोशन सेंसरिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है.


इस गेम में जबरदस्त एक्शन देखने को मिलता है. अब ये गेम जितना पॉपुलर हो रहा है उतना ही पबजी विवादों से भी घिरता हुआ दिखाई दे रहा है. पबजी गेम को भारत में बैन किए जाने का मुददा कई बार उठ चुका है.

लेकिन इस बार फिर ये बहस जोर पकड रही है कि क्या पबजी गेम लोगों को दिमागी रूप से बीमार बना रहा है. बीते दिनों गुजरात के राजकोट में पबजी गेम खेलने पर 10 स्टूडेन्टस को गिरफ्तार कर लिया गया.

हालांकि बाद में इन सभी स्टूडेन्टस को छोड दिया गया था. जबकि इससे पहले ही गुजरात सरकार ने जिलाधिकारियों को एक सर्कुलर जारी करते हुए पबजी पर बैन लगाने को था. जम्मू-कश्मीर और गोवा में भी पबजी को बैन करने की मांग उठ चुकी है.


जम्मू- कश्मीर में पबजी गेम की वजह से खुद को नुकसान पहुंचाने के कई मामले सामने आ चुके हैं, जबकि देश के कई और हिस्सों से पबजी पर बैन लगाए जाने की मांग उठ रही है.

दरअसल कुछ समय पहले ही राजकोट में घरवालों के पबजी गेम खेलने से मना करने पर 15 साल के एक बच्चे ने आत्महत्या कर ली थी. इस गेम को बैन करने की सबसे बड़ी वजह ये है कि ये गेम काफी हिंसक है.

जिसका असर आदमी के दिमाग पर भी पड़ता है. जिन्हें इस गेम का चस्का लगा है वो कई घंटो तक बगैर खाएं पिए इस गेम को खेलते रहते है. पबजी खेलते हुए कई दफा लोग अपनी सेहत को भी दरकिनार कर गेम में आंखे गड़ाए रहते है.


ये गेम आपको एक ऐसी फैंटेसी में ले जाता है जहां गोलियों की तोबडतोड बौछारों के बीच अपने प्लेयर को बचाकर गेम में खुद को जिंदा रखना होता है. पबजी आपको किसी हॉलीवुड मूवी के सुपर हीरो जैसी फील देता है.

जो किसी को भी पहली ही नज़र में अपनी तरफ खींच लेते है. पबजी गेम अभी कंप्यूटर, एक्सबॉक्स वन, आइओएस और एंड्रॉयड पर भी खेला जाता है.

मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक इस गेम का दिमाग पर नशे से भी अधिक असर होता है, जो कि बेहद खतरनाक है. जिन बच्चों में गेमिंग का एडिक्शन होता है, उनकी फिजिकल एक्टिविटी बंद हो जाती है.


इससे न सिर्फ उनकी सोशल लाइफ खत्म हो जाती है, बल्कि वे नहाना-खाना भी छोड़ने लगते हैं. साथ ही रात-रात भर सोते नहीं हैं. दिन में सोते हैं और स्कूल भी नहीं जाते. बच्चे प्ले ग्राउंड के बजाय प्ले स्टेशन या मोबाइल पर गेम को ज्यादा तवज्जों दे रहे है.

इस गेम की वजह से बच्चा हिंसक और चिड़चिड़ा हो जाता है. साथ ही बच्चे की याददाशत खोने का खतरा रहता है. इसलिए परिजनों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उनका बच्चा गेम खेलने में कम समय बिताएं.

इससे पहले भी जानलेवा ब्लू व्हेल गेम को दुनियाभर में बैन किया जा चुका है. ये गेम्स युवाओं को वर्चुअल प्ले स्टेशन की तरफ ले जा रहे हैं. इसकी वजह से वे न सिर्फ मानसिक तौर पर बीमार हो रहे हैं, बल्कि स्कूलों में उनका परफॉर्मेंस भी प्रभावित होने लगा है.

अब अगर आप भी इस गेम के इस हद तक दीवाने है और दिनभर पबजी खेलने में लगे रहते तो है इससे न सिर्फ आप अपना समय बर्बाद कर रहे है बल्कि अपनी सेहत के साथ भी खिलवाड कर रहे है.