सांसदों को हिदायत, न कमरे में खाएं और न बनाएं, भूख लगे तो कैंटीन आएं

नई दिल्ली, 19 जुलाई. सरकारी आवास मिलने तक वेस्टर्न कोर्ट के नए बने हॉस्टल में ठहराए गए सांसदों के लिए कड़े निर्देश जारी किए गए हैं.

नए निर्देशों के अनुसार सांसद अपने कमरे में न खाना बनवा सकते हैं और न ही कैंटीन से चाय-पानी मंगा सकते हैं.

भूख लगने पर उन्हें आम जन की तरह वेस्टर्न कोर्ट एनेक्सी की कैंटीन में ही आना होगा. हां बीमार होने या विशेष परिस्थितियों में ही कैंटीन का स्टाफ उनके कमरे तक लंच या डिनर पहुंचाएगा.

एनेक्सी प्रबंधन ने इसको लेकर कैंटीन संचालक को भी निर्देश दिए हैं कि सांसदों के रौब में आकर उन्हें कमरे में खाने-पीने की चीजें न पहुंचाई जाएं.

वेस्टर्न कोर्ट की नई बिल्डिंग के रिसेप्शन पर एक नोटिस भी लगाया गया. जिसमें यहां ठहरने के चार्जेज के अलावा स्पष्ट तौर पर लिखा है कि कमरों के अंदर खाना बनाना मना है.

यह वही हॉस्टल है, जिसका पिछले साल चार अप्रैल 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया था. यहां पहली बार चुनकर आए सांसदों के रहने की अस्थाई व्यवस्था की गई है.

सरकारी आवास मिलने के बाद ही सांसद यहां से हटेंगे. फिलहाल 82 नए सांसद वेस्टर्न कोर्ट के नए बने आलीशान भवन के कमरों में ठहरे हुए हैं.

वेस्टर्न कोर्ट में सांसदों के रहने की व्यवस्था देखने वाले एक अफसर ने कहा कि सांसदों के नाश्ता, लंच, डिनर की व्यवस्था कैंटीन में ही है.

सांसदों को रूम सर्विस की सुविधा नहीं है. वह कमरे में लंच-डिनर नहीं मंगा सकते, बल्कि उन्हें कैंटीन आना होगा. कमरों के अंदर भोजन बनाने पर भी रोक है.
कब बना वेस्टर्न कोर्ट

लुटियंस दिल्ली में बने मुख्य वेस्टर्न कोर्ट का निर्माण कनॉट प्लेस के दौरान 1931 में ही किया गया था. ब्रिटिश वास्तुविद एडविन लुटियन की टीम से जुड़े रॉबर्ट टोर रसेल ने इसका खाका खींचा था.

इस हॉस्टल में सांसद या उनकी सिफारिश पर उनके गेस्ट रह सकते हैं. मोदी सरकार ने वेस्टर्न कोर्ट के मुख्य भवन के पीछे स्थित जमीन पर 88 कमरों वाला नया एनेक्सी भवन पिछले साल अप्रैल में तैयार करवाया था. जिसमें इस बार नए सांसदों के ठहरने की व्यवस्था की गई है.

हालांकि वेस्टर्न कोर्ट एनेक्सी में रहने के लिए सांसदों या उनके गेस्ट को शुल्क भी चुकाना पड़ता है. चूंकि भवन के अभाव में सांसदों के रहने की व्यवस्था यहां होती है.

ऐसे में उनका खर्च सरकार उठाती है. मगर खाने-पीने का खर्च उन्हें अपनी जेब से ही भरना पड़ता है. सूत्र बताते हैं कि पिछली सरकारों में इन हॉस्टल्स में रहने वाले सांसद खाने-पीने का खर्च चुकाने में आनाकानी करते थे.

मगर अब उन्हें सिर्फ रहना छोड़कर खाने-पानी की कीमत चुकानी ही पड़ती है. गेस्ट को रहने से लेकर खाने-पीने तक सब पैसा देना पड़ता है.

वेस्टर्न कोर्ट के नए हॉस्टल में एक से तीन दिन तक दो सदस्यों के रहने पर दो हजार रुपये प्रतिदिन का चार्ज लगता है. चार से सात दिन के लिए तीन हजार रुपये प्रतिदिन देना पड़ता है.

होटल के खर्च से बचाने के लिए बना हॉस्टल
2014 का जब लोकसभा चुनाव हुआ था तो 300 से ज्यादा नए सांसद चुने गए थे. इस दौरान आवास की समस्या खड़ी हो गई थी.

वजह कि पुराने ज्यादातर सांसदों ने घर खाली ही नहीं किए थे. जिसके बाद नए सांसदों को नई दिल्ली के महंगे होटलों में ठहराना पड़ा था.

कई सांसद निर्धारित से ज्यादा दिन तक पांच सितारा होटलों में ठिकाना बनाए रखे. जिस पर 30 करोड़ से अधिक रुपये खर्च हुए थे.

जिसके बाद मोदी सरकार ने नए सांसदों के अस्थाई निवास के लिए जनपथ स्थित वेस्टर्न कोर्ट के पिछले हिस्से में 88 नए ब्लॉक बनाने की योजना पर काम शुरू किया था.

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