दाग अच्छे हैं!

विक्रम उपाध्याय/सौरभ राय की रिपोर्ट

पक्षविपक्ष के जो नेता मोदी-विरोध की धुरी बनने का दावा कर रहे हैं, उनके सामने विश्वसनीयता का संकट है. उनमें अधिसंख्य का दामन दागदार है. उन पर घोटाले के आरोप हैं. आपराधिक छवि उनका पीछा नहीं छोड़ रही है. प्रशासनिक अक्षमता सामने आ चुकी है.

मायावती, अखिलेश यादव, चंद्रबाबू नायडू, लालू यादव, तेजस्वी यादव, हेमंत सोरेन, स्टालिन, ममता बनर्जी जैसे नेताओं के दामन दागदार हैं. यह भी कि करीब-करीब सभी नेता पारिवारिक विरासत की उपज हैं.

मायावती : मूर्तियों से प्रेम

लोकसभा चुनाव के ठीक पहले सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी ने बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. सर्वोच्च न्यायालय ने लखनऊ, नोएडा और गे्रटर नोएडा के स्मारकों में लगी मायावती, काशीराम और बसपा के चुनाव चिन्ह हाथी की बहुतायत मात्रा में लगी मूर्तियों को लेकर तल्खी जाहिर की। इन मुर्तियों के निर्माण पर 5,919 करोड़ रुपये खर्च हुए थे.

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने 8 फरवरी को सुनवाई के दौरान कहा कि ‘ हमारा ऐसा विचार है कि मायावती को अपनी और अपनी पार्टी के चुनाव चिन्ह की मूर्तियां बनवाने पर खर्च हुआ सरकारी धन सरकारी खजाने में वापस करना होगा.


मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने मायावती के वकील सतीश चन्द्र मिश्र द्वारा प्रकरण की अगली सुनवाई मई 2019 के बाद करने के आग्रह को भी ठुकरा दिया और कहा कि अब सुनवाई 2 अप्रैल को होगी. मायावती के शासन काल में लखनऊ, नोएडा व ग्रेटर नोएडा में बने स्मारकों पर 5919 करोड़ रुपये खर्च हुए थे.

स्मारकों में बसपा संस्थापक कांशीराम व बसपा प्रमुख मायावती की प्रतिमाओं के अलावा 116 हाथी की मूर्तियां भी लगवाई गयीं थी. कांशीराम व मायावती की प्रतिमाओं पर 1.26 करोड़ तथा हाथियों पर 54 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए. 2012 में प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मायाराज में बनवाए गए स्मारकों की जांच कराई थी.

जांच में लखनऊ, नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा में बनवाए स्मारकों पर 5919 करोड़ रूपये खर्च होने खुलासा हुआ. इसमें 4000 करोड़ रुपये से ज्यादा के पत्थरों की खरीद पर खर्च की गई थी. पुलिस की अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की जांच में सामने आया कि हाथियों की मूर्तियां लगाने पर 54 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए.

मात्र राजधानी में 1.26 करोड़ की लागत से कांशीराम व मायावती की प्रतिमाएं लगीं. विधान मण्डल के पटल पर 2014 में पेश की गई सीएजी की रिपार्ट में भी मायाराज में स्मारकों के निर्माण में बड़े पैमाने पर घोटाले का खुलासा हुआ था. लखनऊ और नोएडा तक स्मारकों के निर्माण लगभग 750 एकड़ जमीन……………

पूरा लेख पढ़ें यथावत के 16-28 फरवरी के अंक में

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