बीसीसीआई अध्यक्ष पद के चयन बैठक में हुई खूब खींचतान, जानें गांगुली कैसे निकले बृजेश पटेल से आगे

खेल डेस्क. इंडियन क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज कप्तान सौरव गांगुली का बीसीसीआई का नया अध्यक्ष बनना लगभग तय हो गया हैं. लेकिन इस बार अध्यक्ष पद के लिए नामित होने तक गांगुली के लिए राह आसान नहीं थीं.

इसकी एक वजह ये है कि बीसीसीआई देश की सबसे अमीर खेल संस्था है जिस वजह से इसमें राजनीतिक दखल भी हमेशा से रहता है. इसलिए भारी-भरकम रसूख वाले लोग लॉबिंग के जरिए ही बीसीसीआई अध्यक्ष बन पाते है.

रविवार को मुंबई के एक पांच सितारा होटल में दुनिया की सबसे धनी क्रिकेट संस्था के ‘बॉस’ चुनने को लेकर बैठक हुई थी. इस बैठक में पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और एन श्रीनिवास के गुट आमने-सामने थे.

एक तरफ श्रीनिवासन पूर्व क्रिकेटर बृजेश पटेल के समर्थन में थे तो दूसरी तरफ गांगुली के पक्ष में बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर थे. क्रिकेट की दोनों पावरफुल लॉबी ने अपने-अपने उम्मीदवार को अध्यक्ष बनाने की पुरजोर कोशिश में लगी हुई थी.

इस बैठक में खूब ड्रामा भी हुआ. काफी लंबी खींचतान के बाद बैठक में सब गांगुली के नाम पर सहमत हो गए. वहीं बृजेश पटेल को आईपीएल का चैयरमैन बनाने पर सहमति बन गई.

गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह को बीसीसीआई के सचिव बनाया जा सकता है वहीं अनुराग ठाकुर के भाई अरुण सिंह ठाकुर कोषाध्यक्ष बनाए जा सकते हैं. श्रीनिवासन ने गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर बृजेश पटेल के नाम की वकालत की थी.

जबकि गांगुली को अनुराग ठाकुर का भी समर्थन प्राप्त था. ठाकुर BCCI के अध्यक्ष रह चुके हैं केंद्र में मंत्री होने के साथ-साथ उनका क्रिकेट प्रशासन में अच्छा दखल माना जाता है.

ऐसे में गांगुली की उम्मीदवारी को भी जबरदस्त समर्थन मिला. अंत में गांगुली को अध्यक्ष बनाने को लेकर सहमति बनी. गांगुली का कार्यकाल 10 महीने का होगा. फिलहाल गांगुली बंगाल क्रिकेट असोसिएशन के अध्यक्ष हैं.


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