ATM
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  • देशभर के ज्यादातर लोग कैश के लिए ATMs मशीन का इस्तेमाल करते हैं
  • रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों के, एटीएम के, और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के कई नियमों में बदलाव करते हुए इन्हें कड़े कर दिया है

नई दिल्ली.देश तेजी से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की तरफ बढ़ रहा है.लेकिन इसके बावजूद भी देश के ज्यादातर लोग कैश पर ही निर्भर है. वो हर काम के लिए कैश का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं.

कैश के लिए करते हैं ATMs मशीन का इस्तेमाल-

देशभर के ज्यादातर लोग कैश के लिए ATMs मशीन का इस्तेमाल करते हैं.लेकिन बीते कुछ समय से देखा जा रहा है कि इन मशीनों की संख्‍या कम होती जा रही है. इस वजह से आने वाले समय में कैश ट्रांजेक्‍शन को लेकर संकट बढ़ सकता है.

कम हो रही ATM मशीनें-

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकों के, एटीएम के, और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के कई नियमों में बदलाव करते हुए इन्हें कड़े कर दिया है.इस वजह से एटीएम और बैकों को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ रही है.

कंपनियों को हो रहा नुकसान-

जिसके कारण बैंकों को और एटीएम लगाने वाली कंपनियों को नुकसान हो रहा है.इस नुकसान की वजह से लगातार एटीएम मशीनों की संख्‍या में कटौती हो रही है. हालांकि इनमें होने वाले ट्रांजेक्शन की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है.

इतने घटे एटीएम-

आरबीआई के मुताबिक, 2011 में जहां देश में कुल एटीएम की संख्या 75 हजार 600 थी, वहीं 2017 में यह बढ़कर 2 लाख 22 हजार 500 हो गई. हालांकि, इसके बाद पिछले 2 Finance Year से एटीएम की संख्या लगातार घट रही है और 2019 मार्च तक देश में कुल 2 लाख 21 हजार 700 एटीएम थे.

इस तरह 2 Finance Year में ही 800 एटीएम बंद हो गए है. दूसरी ओर, 2017 में जहां देश में एटीएम का कुल इस्तेमाल 71.06 करोड़ बार हुआ था, वहीं 2019 ये संख्या बढ़कर 89.23 करोड़ पहुंच गई। यानी दो वित्त वर्ष में ही एटीएम से 18.17 करोड़ बार ज्यादा ट्रांजेक्शन हुआ.

ये है एटीएम कम होने का कारण-

एटीएम के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अपग्रेड को लेकर जो नए नियम आए हैं उनके चलते पुराने ATM को चलाना मुश्किल हो जाएगा. इसके अलावा कैश मैनेजमेंट स्टैंडर्ड और कैश लोडिंग को लेकर भी नियम जारी हुए हैं. इससे एटीएम कंपनियां, ब्राउन लेबल और व्हाइट लेबल एटीएम प्रदाता पहले ही नोटबंदी के दौरान हुए घाटे से जूझ रहे हैं.

आरबीआई ने कही ये बात-

एटीएम मशीनों के कम होने को लेकर आरबीआई के डेप्युटी गवर्नर आर. गांधी का कहना है कि एटीएम ऑपरेटर उन बैंकों से इंटरचेंज फीस वसूलते हैं, जिनका कार्ड इस्तेमाल किया जाता है. इस फीस का इजाफा न होने के चलते एटीएम की संख्या में कमी आ रही है.

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