POLITICS में सबसे पहले BJP और पीएम मोदी ने पकड़ी थी सोशल मीडिया की नब्ज

नई दिल्ली. सोशल मीडिया हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा हो गया है. और अपनी बात रखने का एक सश्क्त माध्यम बन गया है. इस बात को सबसे पहले पॉलिटिक्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समझा.

2014 लोकसभा चुनाव ने बीजेपी ने इस प्लेटफॉर्म का जमकर इस्तेमाल किया. सोशल मीडिया के जरिए देश की जनता पर छा गए थे. बीजपी और मोदी के सोशल मीडिया पर बढ़ते प्रभाव ने दूसरी पार्टियों को बेचैन कर दिया.

इसका नतीजा ये निकला की गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल किया.

सोशल मीडिया अब समाज और संस्कृति का अनिवार्य हिस्सा बनता जा रहा है. कुछ सालों में चुनावों में सोशल मीडिया की भूमिका बहुत ज़रूरी हो गई है.

सोशल मीडिया बना राजनीति का प्लेटफार्म- आज सोशल मीडिया राजनीति का वो प्लेटफार्म बन गया है जहां इससे दूर रहने वाले नेता भी अब इसका हिस्सा बन गए हैं. चुनावी समर में उतरने को बेताव नेता इन दिनों सोशल मीडिया पर कुछ ज्यादा ही सक्रियता दिखा रहे हैं.

लोकसभा 2014 में सोशल मीडिया का बड़ा योगदान
2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने जिस तरह सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया था और जो जीत बीजेपी को मिली थी उसका बहुत बड़ा योगदान सोशल मीडिया को जाता है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावों में जिस तरह से सोशल मीडिया को समझा और इस्तेमाल किया उसका नतीजा काफी अच्छा रहा.

बीजेपी की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले सोशल मीडिया को बीजेपी ने 2019 के लिए भी एक बड़ा हथियार बनाने की तैयारी शुरू कर दी है. इसके तहत पिछले चुनाव के मुकाबले न सिर्फ सोशल मीडिया पर बड़ी तादाद में लोगों को जोड़ा गया है बल्कि अपनी वर्कफोर्स को भी पहले के मुकाबले अधिक मजबूत किया है.

भारत में इंटरनेट और सोशल मीडिया की फैलती चादर में राजनीतिक दलों ने भी पांव डालने शुरु कर दिए हैं.

‘लटके, अटके और भटके प्रॉजेक्ट को पूरा करना लक्ष्य’-पीएम मोदी

पीएम ने पहले ही समझ ली थी नब्ज
मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही समझ चुके थे कि लोगों तक सीधे पहुंचने के लिए सोशल मीडिया बेहद ज़रूरी है. उनके लिए ये केवल जुनून नहीं बल्कि उनकी ज़रूरत बन गया था. और साल 2014 में उनकी जीत के पीछे इसकी बड़ी भूमिका रही थी.

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि आम जनता तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया एक असरदार ज़रिए के रुप में उभरा है और राजनीतिक पर्टियां भी इसका भरपूर लाभ उठा रही हैं.

माया भी कभी रहती थी सोशल साइट से दूर
सोशल मीडिया की एक साइट ट्वीटर पर बसपा सुप्रीमो मायावती की एंट्री इस बात का सबूत है कि आज जनता तक पहुंचने के लिए ये बहुत जरूरी कदम है. मायावती पहले सोशल साइट से दूरी बनाकर रखती थीं.

इंटरनेट-सोशल मीडिया का सहारा
कांग्रेस, बीजेपी, जेडीयू हो या आरजेडी आज जनता तक पहुंचने के लिए सभी नेता सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं. हो भी क्यों न, इसका इस्तेमाल करने वालों में अधिकतर युवा लोग हैं. ज़ाहिर है युवाओं तक पहुंचने के लिए हर संगठन और संस्थान इंटरनेट-सोशल मीडिया का सहारा ले रहा है.

सोशल मीडिया -फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सऐप के ज़रिए राजनीतिक दल लोगों तक पहुंचने के लिए हर तरह की कोशिश कर रहे हैं, ख़ास कर मतदान से ऐन पहले. लोगों तक मन की बात पहुंचाने के लिए ये एक बड़े और प्रभावी माध्यम के तौर पर उभरा है.

आज राजनीतिक पार्टियों को लगता है कि वो सोशल मीडिया के ज़रिए वो अधिक लोगों तक कम खर्चे में पहुंच सकती हैं.

पार्टियां समझती हैं कि प्रिंट या टीवी मीडिया के मुक़ाबले सोशल मीडिया पर निगरानी रख पाना थोड़ा मुश्किल है और इससे वो चुनाव आयोग की स्क्रूटिनी से भी थोड़ा बच सकते हैं.